Home झारखंडपुलिस जांच से न्यायाधीश नाराज, हत्यारे को दी उम्र कैद

पुलिस जांच से न्यायाधीश नाराज, हत्यारे को दी उम्र कैद

by Munna Pathak

पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिला के प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की कोर्ट ने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में दोषी सोबेन मरांडी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है| अदालत ने उस पर कुल दो लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है| मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस अनुसंधान में कई गंभीर खामियां सामने आईं, इसे लेकर अदालत ने नाराजगी जताते हुए फैसले की प्रति झारखंड के मुख्य सचिव, डीजीपी एवं पाकुड़ के एसपी को भेजने का आदेश दिया| अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस ने मामले की जांच तो की, लेकिन कई अहम साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश ही नहीं किए| जांच अधिकारी कैला उरांव ने जब्ती सूची, हत्या में इस्तेमाल हथियार, खून से सने कपड़े और इंजरी रिपोर्ट तक अदालत में प्रस्तुत नहीं की| अभियोजन की ओर से भी इस मामले में महज पांच गवाहों को पेश किया गया| इन कमियों के बावजूद अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से अदालत के सामने रखा और आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में सफलता हासिल की|
घायल पत्नी की गवाही बनी सबसे बड़ा आधार:
मामले में मृतक की पत्नी की गवाही बेहद अहम रही, घटना के दौरान वह खुद भी घायल हुई थी और उसने अदालत में पूरे मामले के बारे में गवाही दी| अदालत ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना, गवाही के दौरान न्यायालय ने खुद भी उससे कई सवाल पूछे और घटना के साथ-साथ उसके घायल होने से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की| उसकी चश्मदीद गवाही को आरोपी की दोष-सिद्धि का महत्वपूर्ण आधार माना गया| अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक लुकास कुमार हेम्ब्रम ने अदालत में प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखा| पुलिस जांच में जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य नहीं आने के बावजूद अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत के सामने अपना मामला रखा| न्यायालय के हस्तक्षेप से मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और अंत में आरोपी को दोषी करार दिया गया| अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई| धारा 307 के तहत जान से मारने की कोशिश के मामले में भी आजीवन सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया| इसके अलावा धारा 326 के तहत सात वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये तथा धारा 452 के तहत पांच वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है| अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी|

दो लाख रुपये मृतक की पत्नी को मिलेंगे, अतिरिक्त मुआवजे का भी निर्देश:
अदालत ने जुर्माने की पूरी दो लाख रुपये की राशि मृतक की पत्नी को मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया है| इससे पीड़िता को कुछ आर्थिक मदद मिल सकेगी| अदालत ने यह भी कहा कि मामले में पीड़िता को सिर्फ जुर्माने की राशि तक सीमित राहत नहीं दी जानी चाहिए| जिला विधिक सेवा प्राधिकार को निर्देश दिया गया है कि पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराया जाए| इस तरह अदालत ने एक ओर जहां हत्या के दोषी को कड़ी सजा दी, वहीं दूसरी ओर पुलिस जांच में हुई लापरवाही को भी गंभीरता से लिया|

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