रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने कोडरमा जिले के मरकच्चो अंचल की बहुचर्चित जमीं पर जिला योजना मद से बनाई जा रही पीसीसी सडक के निर्माण पर रोक लगा दी है| इससे पंचखेरो जलाशय के विस्थापित रैयतों को बड़ी कानूनी राहत मिली है| हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए संबंधित विवादित जमीन पर यथा-स्थिति बहाल रखने का आदेश दिया है|कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मौजा मरकच्चो के थाना नं. 141, खाता नं. 1818, प्लॉट नं. 620 की 4.20 एकड़ रैयती जमीन पर फिलहाल किसी भी तरह का पीसीसी निर्माण कार्य न किया जाए| अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद करेगा|
रैयती जमीन पर सड़क बनाने पर रोक:
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमीन को गैर-मजरुआ बताकर वहां सड़क निर्माण को जायज ठहराने का प्रयास किया हालांकि अदालत ने सरकार के इस आधार को पूरी तरह खारिज कर दिया| कोर्ट ने माना कि यह जमीन रैयती है और इसका मालिकाना हक दशकों पहले सिविल कोर्ट द्वारा तय किया जा चुका है| हजारीबाग के सब-जज की कोर्ट ने वर्ष 1984 को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसे बाद में पटना हाई कोर्ट की रांची बेंच ने 27 जुलाई 1989 को भी बरकरार रखा था| दरअसल मरकच्चो प्रखंड के ग्राम अरकोशा निवासी दामोदर प्रसाद कुशवाहा और अन्य याचिकाकर्ता पंचखेरो जलाशय परियोजना से विस्थापित हुए हैं| खाता नंबर 1818 की कुल 32.20 एकड़ जमीन में से 9.60 एकड़ जमीन पंजी-2 में स्व. नत्थू महतो और मसोमात रेबली देवी के नाम दर्ज है जिसकी मालगुजारी नियमित रूप से दी जा रही है|
हाई कोर्ट के आदेश पर सड़क निर्माण पर रोक:
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक उनकी 5.60 एकड़ जमीन बिना किसी मुआवजा भुगतान के पंचखेरो जलाशय में ले ली गई थी और बाकि बची 4.20 एकड़ जमीन पर वे अरहर की खेती कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं| इसी बची हुई जमीन पर जिला योजना अनाबद्ध निधि से जबरन पीसीसी सड़क बनाई जा रही थी| याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रवि कुमार और राजीव कुमार पांडेय ने अदालत में पक्ष रखा| उन्होंने दलील दी कि बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और बिना मुआवजा दिए किसी की रैयती जमीन पर निर्माण कार्य करना संविधान का सीधा उल्लंघन है| हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब जिला प्रशासन को विवादित जमीन पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोकना होगा|
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