Home खेल-खिलाड़ीझारखंड की गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी खेल निदेशालय में लगा रही झाड़ू-पोछा

झारखंड की गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी खेल निदेशालय में लगा रही झाड़ू-पोछा

by Munna Pathak

झारखंड : राजधानी रांची में विगत आठ-नौ वर्षों से खेल निदेशालय में झाड़ू-पोछा का कार्य कर रही है झारखंड की गोल्ड मेडलिस्ट सुनीता उरांव| सुनीता उरांव ने हमारे संवाददाता से अपनी आप-बीती सुनाते हुए कहा कि यह कार्य मुझे मज़बूरी में करनी पर रही है, मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, इस कार्य के बदले ठीक से पैसा भी समय पर नहीं मिलती है जिससे और तकलीफ होती है| सुनीता उरांव ने झारखंड सरकार से खेल कोटा के तहत नौकरी देने की मांग की है| रांची के मोराबादी में स्थित खेल निदेशालय के परिसर में सुनीता उरांव झाड़ू-पोछा का काम करती हैं| इसके बदले में उन्हें मेहनताने के रूप में 10 हजार रुपये प्रति महीने मिलते हैं| लेकिन शर्मनाक बात ये है कि जिस खिलाड़ी ने राज्य के लिए दो गोल्ड मेडल सहित पांच मेडल जीते, उस खिलाड़ी का जहां सम्मान होना चाहिए, वहां सुनीता झाड़ू पोछा करती हैं|
सुनीता ने दो बार गोल्ड जीता:
सुनीता उरांव ने बताया कि थ्रो बॉल और बॉलीबॉल की प्लेयर रही हैं, उन्होंने दो बार गोल्ड, सिल्वर और कुछ अन्य मेडल भी जीती, लेकिन खेल विभाग का उन पर कोई ध्यान नहीं गया| जबकि उन्होंने झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए तमिलनाडु और राजस्थान में होने वाले प्रतियोगिताओं में जाकर खेल चुकी हैं|
झाड़ू-पोछा लगाना अच्छा नहीं लगता:
गोल्ड मेडलिस्ट सुनीता उरांव ने सवालिया लहजे में कहा कि उन्हें झाड़ू-पोछा लगाना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन क्या करें, कुछ करेंगे नहीं तो क्या खाएंगे? हम तो रेंट पर रहते हैं, हर महीने रेंट भी देना होता है| उन्होंने बताया कि वो यहां आठ घंटे काम करती हैं, तब महीने के लास्ट में उन्हें सैलरी मिलती है, जो रेंट और बाकी की जरूरतों में ही चली जाती है|
बिजुपाड़ा में रहने वालीं सुनीता उरांव ने बताया कि उनके मां-बाप नहीं है, वो अपने भइया-भाभी के साथ रहती हैं| उन्होंने बताया कि वो दो भाई और दो बहनें हैं, भाई भी भट्टा पर मजदूरी करने जाता है, ऐसे में वो भी मदद नहीं सकता है|
सीएम हेमंत सोरेन से जॉब की अपील:
सीएम हेमंत सोरेन से जॉब दिलाने की अपील करते हुए सुनीता उरांव ने कहा कि वो झाड़ू-पोंछा नहीं करता चाहती हैं| वह अपनी मेहनत से आगे बढ़ना चाहती हैं और ऐसा काम करना चाहती हैं, जिससे उन्हें सम्मान के साथ जीवन जी सके|

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