पटना: महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन और उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में सिनेमा की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, उक्त बातें भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कही| वे स्थानीय बापू टावर के सभागार में आयोजित तीन दिवसीय ‘गांधी फिल्म फेस्टिवल’ के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर बोल रहे थे| कार्यक्रम का उद्घाटन के पश्चात उन्होंने कहा कि गांधी जी का प्रभाव फिल्मों पर शुरुआत से ही रहा है| आधुनिक समय में उनके विचारों पर केंद्रित फ़िल्में बन रही हैं| कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ‘गांधी और फिल्म’ विषय पर केंद्रित विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ| बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने इस टावर के उद्देश्यों तथा गांधीवादी विचारों को फिल्मों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व को रेखांकित किया| पटना भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की क्षेत्रीय निदेशक श्रीमती स्वधा रिजवी तथा सिने सोसाइटी के अध्यक्ष आर.एन. दास (सेनि भाप्रसे) ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार साझा किए|
गांधीजी का जीवन सिनेमाई कैनवास:
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने “गांधी और फिल्म” विषय पर अपना विस्तृत वक्तव्य प्रस्तुत किया| उन्होंने कहा कि गांधी जी का जीवन अपने आप में एक सिनेमाई कैनवास की तरह है, जिसने दुनिया भर के फिल्मकारों को प्रेरित किया है| गांधी संग्रहालय के सचिव रजी अहमद ने गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला|
11 सितंबर को ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ फिल्म का प्रदर्शन:
गांधी फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन सुबह 11 बजे मशहूर रिचर्ड एटनबरो की ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ (1982) दिखाई गई| वहीं दोपहर 3 बजे ‘गांधी – 20वीं सदी के पैगंबर’ (1940) का प्रदर्शन किया गया| फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन यानी आज ‘महात्मा गांधी टॉक्स’ (1931) और ‘ए बाउंडलेस आइडिया’ (1970) का प्रदर्शन होगा, जो गांधीवादी दर्शन पर आधारित है| तीसरे और आखिरी दिन 11 सितंबर को तीन फिल्मों का प्रदर्शन रखा गया है| इसमें सुबह 11 बजे ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ (2005) दिखाई जाएगी, जो आधुनिक संदर्भ में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता पर है|इसके बाद ‘नोआखली एक्सट्रैक्ट्स’ (1946) और ‘साउथ इंडिया टूर ऑफ महात्मा गांधी’ (1946) जैसी ऐतिहासिक फुटेज वाली फिल्में दिखाई जाएंगी| कार्यक्रम में बापू टावर के अवर सचिव अरूण कुमार पाठक, उप-निदेशक ललित कुमार सिंह के अलावा बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, दर्शक एवं गणमान्य लोग उपस्थित दिखे|
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