पटना : स्वास्थ्य व्यवस्था का सशक्त स्तंभ फिजियोथेरेपी, यह केवल दर्द कम करने की पद्धति नहीं बल्कि व्यक्ति को उसकी क्षमता, आत्मविश्वास और जीवन की गति वापस दिलाने का विज्ञान है| उक्त बातें ग्रामीण विकास, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने आयोजित कार्यक्रम में कही| वे स्थानीय मौर्या होटल में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय फिजियोथेरेपी सम्मेलन-2026 में विशेष अतिथि के तौर पर बोल रहे थे| मंत्री ने कहा कि आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, हमारा संकल्प सिर्फ आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है| हम एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते हैं जो स्वस्थ हो, सक्षम हो, आत्मनिर्भर हो और हर नागरिक को सम्मान से जीने का अवसर दे, इस लक्ष्य को हासिल करने में स्वास्थ्य क्षेत्र की भूमिका सबसे अहम है| उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज बनाते हैं और सशक्त समाज ही विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव रखता है| अब दौर सिर्फ बीमार होने के बाद इलाज का नहीं है, हम एक हेल्थ कॉन्शियस सोसाइटी की ओर बढ़ रहे हैं, जहां लोग बीमार होने से पहले ही अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हों| इसमें फिजियोथेरेपी की भूमिका आने वाले समय में और बड़ी होने वाली है|
एआई से फिजियोथैरेपी का भविष्य और प्रभावशाली:
भविष्य की संभावनाओं का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी, जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां, खेल गतिविधियों का विस्तार, सड़क हादसों के बाद पुनर्वास की जरूरत और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने फिजियोथेरेपी में असीम संभावनाएं पैदा की हैं| आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थ और टेली-रिहैबिलिटेशन जैसी तकनीकों के साथ फिजियोथेरेपी का भविष्य और भी प्रभावशाली होगा| उन्होंने युवा फिजियोथेरेपिस्ट पर विश्वास जताते हुए कहा कि वे आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की नई पहचान स्थापित करेंगे| स्वास्थ्य को केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रखना है,स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना होगा|
मौके पर उन्होंने उपस्थित फिजियोथेरेपिस्टों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और छात्रों का अभिनंदन करते हुए कहा कि फिजियोथेरेपी सिर्फ एक पेशा नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की आशा है जो शारीरिक चुनौती के बाद फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखते हैं| उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से नए शोधों और नई संभावनाओं का रास्ता खुलेगा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी| कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यूसी. शामल, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. खुर्शीद आलम, चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. एलबी सिंह, भौतिक चिकित्सक डॉ. उदय शंकर प्रसाद, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. मनोज कुमार मिश्रा, डॉ. पीयूष कुमार सिंह, डॉ. शाहनवाज आलम खान, डॉ. निशांत, डॉ. कुमार निशस, डॉ. मोहम्मद शहजाद आलम, डॉ. अमृता स्वराज सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं छात्र उपस्थित थे|
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