रांची : झारखंड में नाबालिगों से जुड़े अपराधों और पोक्सो मामलों की निगरानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है| अदालत के निर्देशों के अनुपालन में सीआईडी झारखंड और पुलिस विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है| राज्य के सभी जिलों से बच्चों के कानूनी मामलों, सोशल रिपोर्ट और पुलिस विभाग के उपलब्ध बुनियादी ढांचे का पूरा आंकड़ा निर्धारित प्रारूप (एक्सल शीट) में मांगा गया है| यह कार्रवाई झारखंड हाई कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस सह पोक्सो कमेटी के निर्देश पर की जा रही है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट को सौंपने के लिए जिलों से हार्ड व सॉफ्ट कॉपी में आंकड़े मांगे गए हैं| सीआईडी ने इस डेटा संकलन को तीन मुख्य शेड्यूल के तहत विभाजित किया है|
शेड्यूल ‘जी’ – संस्थागत ढांचा और प्रशिक्षण (अवधि: 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026):
इस भाग में जिलों में बच्चों के न्याय और पुनर्वास से जुड़े कानूनी ढांचे तथा मानव संसाधन की अद्यतन स्थिति मांगी गई है|
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में विशेष न्यायाधीशों और जिलों में समर्पित चिल्ड्रन्स कोर्ट की कुल संख्या|
जिलों में कार्यरत जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट और उनमें तैनात सोशल वर्कर्स का ब्योरा|
लीगल-कम-प्रोबेशन अधिकारियों की संख्या के साथ-साथ इंडक्शन ट्रेनिंग प्राप्त सदस्यों और पुलिस अधिकारियों का पूरा आंकड़ा|
शेड्यूल ‘जे’ – सोशल इन्वेस्टिगेशन और बैकग्राउंड रिपोर्ट (अवधि: 2019 से मध्य 2026):
कानून के उल्लंघन में आए बच्चों के पुनर्वास की दिशा में तैयार की जाने वाली रिपोर्टों का वर्ष-वार और अपराध-श्रेणी के आधार पर ब्योरा मांगा गया है|
एक जनवरी 2019 से 30 जून 2026 तक के लिए वर्ष-वार (2019, 2020, 2021, 2022, 2023, 2024, 2025 और एक जनवरी 2026 से 30 जून 2026) रिपोर्ट की स्थिति|
इसी अवधि के दौरान अपराध की प्रकृति और श्रेणी के आधार पर तैयार की गई सोशल बैक ग्राउंड रिपोर्ट का पूरा रिकॉर्ड|
न्यायपालिका का उद्देश्य राज्य में बाल न्याय प्रणाली को और मजबूत करना, मामलों के त्वरित निष्पादन को सुनिश्चित करना और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करना है|
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