पटना: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग,के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यिन के नेतृत्व में बिहार की राजधानी पटना में दो दिवसीय जन सुनवाई एवं शिविर का समापन हुआ| आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन षड़ंगि और श्रीमती विजया भारती सयानी ने पीड़ितों एवं संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में मानव अधिकार उल्लंघन के 70 से अधिक कथित मामलों की सुनवाई की| इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक सुश्री प्रीता वर्मा, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महासचिव पीयूष गोयल, महानिदेशक (अन्वेषण) श्रीमती अनुपमा निलकर चंद्रा, संयुक्त सचिव समीर कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे|
शिविर के पहले दिन,आयोग ने 30 मामलों की सुनवाई की और संबंधित पक्षों को सुनने तथा यह पाए जाने के बाद कि आयोग की सिफारिशों का अनुपालन किया जा चुका है, 19 मामलों का निस्तारण कर दिया| राज्य सरकार ने आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 10 मामलों में भुगतान किए जाने के प्रमाण प्रस्तुत किए, जिससे पीड़ितों और उनके परिवारों को राहत मिली| कुल मिलाकर, 1 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि वितरित किए जाने की जानकारी दी गई| यह मानव अधिकार उल्लंघन के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने और पीड़ितों को उचित राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है|
मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित विभिन्न मामलों पर सुनवाई की गई| एक महिला पीड़िता से संबंधित मामले में आयोग ने बिहार के पुलिस महानिदेशक को पीड़िता को सुरक्षा प्रदान करने तथा एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, जिस पर वह किसी भी प्रकार की धमकी मिलने या आवश्यकता पड़ने पर संपर्क कर सके| डीजीपी को आयोग के निर्देशानुसार एक विशेष जांच दल गठित करने का भी निर्देश दिया गया| पटना जिले के मनेर क्षेत्र में 10 वर्षीय बालिका के साथ बलात्कार और उसकी हत्या से संबंधित एक अन्य मामले में, आयोग ने पीड़िता के निकटतम परिजनों को 5 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान करने की सिफारिश की| न्यायिक हिरासत में मृत्यु के दो अन्य मामलों में, आयोग ने जेल/चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही पाई और 15 लाख रुपये की राहत राशि प्रदान करने की सिफारिश की|
जन सुनवाई के दूसरे दिन राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ने बंधुआ मजदूरी के कथित 10 मामलों की सुनवाई की| इस दौरान बिहार सरकार के श्रम सचिव, श्रम आयुक्त तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे| बंधुआ मजदूरी के एक मामले में, जिला अधिकारी की ओर से उपस्थित जेल अधिकारी के संबंध में आयोग ने अपनी नाराजगी व्यक्त की| बाल श्रम से संबंधित दो मामलों में आयोग ने श्रम सचिव को आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुसार विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया| बहु-पीढ़ीगत बंधुआ मजदूरी की कथित प्रथा से संबंधित एक मामले में आयोग ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महानिदेशक (अन्वेषण) को मौके पर जाकर जांच करने का निर्देश दिया|
इसी दिन, आयोग की द्विसदस्यीय पीठ, जिसमें सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन षड़ंगि और श्रीमती विजया भारती सयानी शामिल थीं, ने 33 मामलों की सुनवाई की| इनमें अनुपालन से संबंधित मामले तथा मानव अधिकारों के कथित उल्लंघन की अन्य शिकायतें शामिल थीं| शिकायतकर्ता द्वारा अनुरोध किए जाने पर सूची में शामिल नहीं किए गए तीन मामलों को भी निर्धारित क्रम से हटकर सुनवाई के लिए लिया गया| कार्यवाही के दौरान, आयोग ने संबंधित पक्षों को सुनने तथा अनुपालन रिपोर्टों और मृतक के निकटतम परिजनों को 40 लाख रुपये मुआवजे के भुगतान के प्रमाणों की समीक्षा करने के बाद 10 मामलों का निस्तारण कर दिया| न्यायिक/पुलिस हिरासत में मृत्यु के पांच अन्य मामलों में, जहां आयोग ने जेल/पुलिस अधिकारियों की लापरवाही पाई, 30 लाख रुपये की मौद्रिक राहत देने की सिफारिश की गई| अन्य मामलों में संबंधित अधिकारियों से अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी गई हैं| सुनवाई के बाद, आयोग ने बिहार राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज संगठनों और मानव अधिकार संरक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया| आयोग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के उनके सुझाव को अध्यक्ष ने स्वीकार किया|
आयोग ने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की, इस बैठक में आयोग को रिपोर्ट प्रस्तुत न करने अथवा विलंब से प्रस्तुत करने, संबंधित अधिकारियों में कानूनों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के संबंध में जानकारी के अभाव, बंधुआ मजदूरों की पहचान, बचाव, मुक्ति और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों, पुलिस द्वारा मानव अधिकारों के उल्लंघन, मानव दुर्व्यापार सहित महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, निषेध संबंधी कानूनों के उचित क्रियान्वयन के अभाव तथा इसके परिणाम स्वरूप होने वाली जनहानि, बाल श्रम सहित बच्चों की सुरक्षा, विद्यालयों की सुरक्षा एवं बाल कल्याण, आश्रय गृहों, सुधार गृहों तथा अन्य आवासीय देखभाल संस्थानों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई| जन सुनवाई एवं शिविर बैठक के समापन पर, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ने अधिकारियों के सहयोग की सराहना की| उन्होंने कहा कि अधिकारियों के इस सहयोग से पीड़ितों को राहत प्रदान करने में सहायता मिली|
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