Home नई दिल्लीमानवीय गरिमा के संवर्धन पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

मानवीय गरिमा के संवर्धन पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

by Munna Pathak

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अपने 33वें स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत ‘जल जीवन का अमृत है: जल के अधिकार के माध्यम से मानवीय गरिमा का संवर्धन’ विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया|इस सम्मेलन में सरकारी संस्थानों, विकास संगठनों तथा अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया| सम्मेलन में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच, जल संसाधनों के सतत प्रबंधन, जल निकायों के पुनर्जीवन, सामुदायिक भागीदारी तथा जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता सहित जल से जुड़े मानव अधिकार संबंधी विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया| जल संरक्षण, सततता और सामुदायिक भागीदारी’ विषय पर आयोजित प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए, जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक (परियोजनाएं),बृजेंद्र स्वरूप ने इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी भेद-भाव के पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती जल तक पहुंच मानवीय गरिमा की बुनियादी आवश्यकता है|उन्होंने नमामि गंगे कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोणपर प्रकाश डाला| उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में निर्मल धारा (प्रदूषण-मुक्त प्रवाह), अविरल धारा (निरंतर प्रवाह) सुनिश्चित करना तथा गंगा नदी की भूवैज्ञानिक और पारिस्थितिक अखंडता का संरक्षण करना शामिल है|इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग43,326 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 527 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं|इन परियोजनाओं में प्रदूषण उन्मूलन, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, अनुसंधान तथा आजीविका संवर्धन जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं|

नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक युगल किशोर जोशी ने भारत के समक्ष जल सुरक्षा की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए बताया कि देश के पास विश्व के कुल मीठे जल संसाधनों का लगभग 4 प्रतिशत है, जबकि यहां विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी निवास करती है| उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता घटकर लगभग 1,300–1,400 घन मीटर रह गई है, जो 1,700 घन मीटर के जल-संकट स्तर से नीचे है|उन्होंने पारंपरिक जल संचयन पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ एकीकृत करने, ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने, जल बजट तैयार करने तथा जल निकायों पर अतिक्रमण की समस्या का समाधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया| लगभग 800 गांवों को शामिल करने वाली एक समुदाय-आधारित पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत 731 गांवों में जल निकायों का पुनर्जीवन पूरा किया जा चुका है| प्रत्येक जल निकाय के पुनर्जीवन पर लगभग 3 लाख रुपये की लागत आई| उन्होंने इस कार्य में सामुदायिक श्रम तथा खुदाई से निकली गाद और मिट्टी के उत्पादक उपयोग के महत्व को रेखांकित किया| उन्होंने स्थानीय संस्थाओं को अधिक सशक्त बनाने, निगरानी व्यवस्था में सुधार करने तथा सफल जल संरक्षण पहलों को व्यापक स्तर पर अपनाने का आह्वान किया|

एस.एम.सहगल फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं ट्रस्टी, सुश्री अंजलि मखीजा ने जल एवं कृषि संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए समुदायों, सरकार, विकास संगठनों, शिक्षाविदों तथा अन्य हितधारकों के बीच सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला| तरुण भारत संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि जल के भी अपने अधिकार हैं और नदियों को निर्मल (शुद्ध) एवं अविरल (बिना रुकावट निरंतर प्रवाहित) बनाए रखना आवश्यक है| उन्होंने कहा कि जल के मानव अधिकार के साथ-साथ नदियों की पारिस्थितिक अखंडता का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए|भारत की प्राकृतिक संपदा और उसमें आई गिरावट का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामुदायिक भागीदारी, पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों तथा पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के माध्यम से 23 नदियों के पुनर्जीवन के अपने अनुभव साझा किए| ‘पेयजल सेवाओं को सुदृढ़ बनाना और स्थानीय शासन’ विषय पर आयोजित दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव,अशोक के.के.मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित पेयजल मानवीय गरिमा, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है|

वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत नियोजित जल कनेक्शन संबंधी बुनियादी ढांचे का लगभग 82 प्रतिशत तैयार किया जा चुका है| उन्होंने बताया कि लगभग 25 प्रतिशत विकासखंड भूजल की दृष्टि से गंभीर, अर्ध-गंभीर या अत्यधिक दोहन वाली श्रेणियों में आते हैं| सतही जल पर निर्भर योजनाओं का अनुपात 15 प्रतिशत से बढ़कर 48 प्रतिशत हो गया है, जबकि भूजल पर निर्भर योजनाओं का अनुपात 85 प्रतिशत से घटकर 52 प्रतिशत रह गया है|प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, किसान एवं भूजल संरक्षणवादी उमा शंकर पांडेय ने सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण के अत्यंत महत्वपूर्ण होने पर जोर दिया| उन्होंने जल के व्यावसायीकरण और उसकी बर्बादी से जुड़ी चिंताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि सुरक्षित पेयजल तक पहुंच सुनिश्चित करना सरकार और समुदाय, दोनों की साझा जिम्मेदारी है|उन्होंने जल साक्षरता बढ़ाने, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया| जंगल में लगी आग बुझाने का प्रयास करने वाली एक छोटी-सी चिड़िया का उदाहरण देते हुए उन्होंने व्यक्तिगत योगदान के महत्व को रेखांकित किया| जन-जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नए भारत का निर्माण प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी होना चाहिए|उन्होंने अपने नारे“खेत में मेड़, मेड़ पर पेड़” को दोहराते हुए कृषि भूमि की मेड़ों पर वृक्षारोपण करने की वकालत की और इसे सतत जल संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पद्धति बताया|

वॉटरएड इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी,आनंद शेखर ने जल को मौलिक मानव अधिकार के रूप में महत्व देने के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, भारत के दृष्टिकोण की सराहना की| उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक घर में नल कनेक्शन के साथ जल के सतत स्रोत की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लोगों को विश्वसनीय रूप से पानी मिलता रहे|उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में भारत में स्वच्छता का दायरा 20 प्रतिशत से भी कम था| उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व, सार्वजनिक निवेश और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने तथा पांच वर्षों के भीतर सभी ग्रामीण परिवारों तक सतत स्वच्छता सेवाएं पहुंचाने में हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया|

समापन सत्र में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यिन ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया| उन्होंने जीवन को बनाए रखने तथा पारिस्थितिक संतुलन कायम रखने में प्रकृति के पांच तत्वों अर्थात् पंच महाभूत के महत्व को रेखांकित किया| जल के गुणों और महत्व पर विचार करते हुए उन्होंने पैनल के वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत संरक्षण के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की सराहना की तथा सामूहिक प्रयासों और सभी हितधारकों की भागीदारी पर जोर दिया| उन्होंने श्रद्धा और व्यवहार के बीच मौजूद विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज अक्सर उन चीजों की रक्षा करने में विफल रहता है, जिनका वह सम्मान करता है| इस संदर्भ में उन्होंने महिलाओं और जल का उदाहरण दिया|उन्होंने इस अंतर को दूर करने के लिए जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा जल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया| आयोग के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि संरक्षण के प्रयास तत्काल शुरू किए जाने चाहिए| उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी ने अपने पूर्वजों के प्रयासों और बलिदानों से लाभ प्राप्त किया है तथा उसका दायित्व है कि वह भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करे|उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों के समग्र प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि संरक्षण संबंधी पहलों के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण आवश्यक है, भले ही उनके परिणाम सामने आने में कई दशक लग जाएं| उन्होंने वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु समयबद्ध, निरंतर और सहयोगात्मक कार्रवाई का आह्वान किया|

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महासचिव,पीयूष गोयल ने दोनों विषयगत सत्रों में हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया| उन्होंने जलवायु परिवर्तन तथा भूजल के गंभीर स्तर तक घटते जाने की समस्या से निपटने की तात्कालिक आवश्यकता पर जोर दिया| इसके लिए उन्होंने ग्राम पंचायतों, ग्राम स्तर की जल एवं स्वच्छता समितियों, महिला समूहों और नागरिक समाज की भागीदारी से विकेंद्रीकृत एवं समुदाय-आधारित शासन व्यवस्था अपनाने की आवश्यकता बताई|उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर अभी काफी कार्य किया जाना शेष है, लेकिन सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों के बीच घनिष्ठ समन्वय से आगे का मार्ग सकारात्मक और सतत बनाया जा सकता है|राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के संयुक्त सचिव,समीर कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया| उन्होंने मुख्य अतिथि, भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने आमंत्रण स्वीकार किया और अपने विचारों एवं अनुभवों को साझा कर सम्मेलन को समृद्ध बनाया|उन्होंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के मार्गदर्शन और नेतृत्व के लिए भी उनका आभार व्यक्त किया|साथ ही, विभिन्न मंत्रालयों, सरकारी विभागों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों तथा अन्य प्रतिभागियों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद दिया|

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