नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा के पानीपत जिले में बड़ी संख्या में ‘ब्लीचिंग यूनिटें’ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैध अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किए बिना संचालित हो रही हैं| रिपोर्ट के अनुसार, इन इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों को जूते, दस्ताने अथवा अन्य कोई सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिसके कारण वे सीधे खतरनाक रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं| इससे उनके हाथों और पैरों को गंभीर क्षति पहुंच रही है तथा त्वचा संबंधी एलर्जी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं|आयोग का मानना है कि यदि समाचार रिपोर्ट में वर्णित तथ्य सत्य हैं, तो यह मानव अधिकारों का गंभीर मामला है| आयोग ने पानीपत के जिला अधिकारी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है|
30 सितम्बर, 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन ब्लीचिंग इकाइयों में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता है| इन रसायनों के कारण प्रतिदिन कम-से-कम 10 से 12 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हाथों और पैरों के उपचार के लिए सिविल अस्पताल पहुंच रहे हैं| रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन इकाइयों में रसायन युक्त अपशिष्ट जल के निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है तथा इसे सीधे गड्ढों में छोड़ा जा रहा है|
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