नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के एक 12 सदस्यीय परिवार को तेलंगाना के हैदराबाद स्थित मेडचल-मलकाजगिरि जिले के बाचुपल्ली क्षेत्र में एक निर्माण स्थल पर लगभग एक वर्ष तक बंधुआ मजदूर के रूप में रखे जाने की सूचना पर सख्त रूप अख्तियार किया है| बचाव के समय वे कथित रूप से अत्यंत कम मजदूरी पर सातों दिन काम करने के लिए मजबूर किए जा रहे थे, तथा उन्हें शारीरिक एवं मौखिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था| साथ ही वे अत्यंत असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने को विवश थे|आयोग का मानना है कि यदि समाचार रिपोर्ट सत्य हैं, तो यह श्रमिकों के मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है| इसलिए आयोग ने तेलंगाना के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मेडचल-मलकाजगिरि के जिला अधिकारी तथा साइबराबाद के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है|
आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में सभी 12 बचाए गए पीड़ितों की वर्तमान स्थिति और ठिकाने की जानकारी तथा उनकी तत्काल सुरक्षा, आश्रय, भोजन और चिकित्सा देखभाल के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शामिल होना चाहिए| रिपोर्ट में नियोक्ता और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) तथा जांच की वर्तमान स्थिति का विवरण भी शामिल किया जाना अपेक्षित है| आयोग ने मेडचल-मलकाजगिरि के जिला अधिकारी को यह भी निर्देश दिया है कि मुक्ति एवं पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पीड़ित-केंद्रित तरीके से संपन्न की जाए|
आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में यह पुष्टि भी अपेक्षित है कि सभी पात्र पीड़ितों को बंधुआ श्रम मुक्ति प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं| इसके अतिरिक्त, बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना, 2021 के अंतर्गत प्रत्येक पीड़ित को प्रदान की गई 30,000 रुपये तक की तत्काल वित्तीय सहायता का विवरण भी उपलब्ध होना चाहिए| रिपोर्ट में पीड़ितों के दीर्घकालिक पुनर्वास की व्यापक योजना भी शामिल होनी चाहिए, जिसमें उनकी इच्छा होने पर उत्तर प्रदेश वापसी तथा इसके लिए संबंधित राज्य के अधिकारियों के साथ समन्वय का विवरण भी शामिल हो| 30 सितंबर, 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बंधुआ मजदूरों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था तथा उनके सामान को एक पर्यवेक्षक द्वारा बंद करके रखा गया था| सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा की गई शिकायत के बाद राजस्व एवं श्रम विभाग के अधिकारियों ने उन्हें मुक्त कराया था|
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