रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिस थानों की मनमानी कार्यप्रणाली पर सख्त तेवर अपनाया है| न्यायालय ने राज्य के सभी थानों में अनिवार्य रूप से (CCTV) कैमरे नहीं लगाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए झारखंड के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अवमानना कार्रवाई से पूर्व शौ-कॉज नोटिस जारी किया है| अदालत ने इसे अदालत के आदेशों की अवहेलना और टाल-मटोल वाला रवैया करार दिया है| मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने साफ कहा कि राज्य सरकार अदालत के आदेशों का अवहेलना कर रही है|
बढ़ती कस्टोडियल मौतें:
कोर्ट ने चिंता जताई कि वर्ष 2018 के बाद से राज्य में कस्टोडियल डेथ के 450 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद थानों में कैमरे नहीं लगाए गए| (CCTV) लगाने के लिए चार बार टेंडर होने के बावजूद कोई परिणाम न निकलने को अदालत ने प्रशासनिक विफलता माना है| (DGP) द्वारा (CCTV) लगाने की जिम्मेदारी को गृह विभाग पर टालने के बयान को कोर्ट ने गैर-जिम्मेदाराना बताया|
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला ईचागढ़ के तरुण महतो से जुड़ा है,आरोप है कि 19 नवंबर 2025 की रात ईचागढ़ पुलिस उन्हें थाने ले गई, जहां हिरासत में उनके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया और बेरहम पिटाई की गई| इस अमानवीय घटना के खिलाफ तरुण महतो की पत्नी ने झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिस पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया| मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी|
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