Home उत्तर प्रदेशजुड़वा बहनों की आंखों ने आधार सिस्टम को उलझा दिया

जुड़वा बहनों की आंखों ने आधार सिस्टम को उलझा दिया

by Munna Pathak

उत्तर प्रदेश: जुड़वां बच्चे अक्सर चेहरे-मोहरे में इतने एक जैसे होते हैं कि अपनों के लिये भी उन्हें पहचानना चुनौती बन जाता है| लेकिन रामपुर की तूबा और खिजरा की कहानी इससे भी एक कदम आगे निकल गई| यहां मामला सिर्फ चेहरे की समानता का नहीं था, बल्कि बायोमीट्रिक सिस्टम के सामने दोनों बहनों की आंखों और उंगलियों की पहचान भी ऐसी उलझी कि आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया ही रुक गई| तकनीक ने पहचान तय करने के लिये जिन निशानों पर भरोसा किया, वही निशान इस परिवार के लिये परेशानी बन गये|

एक बहन का आधार बना, दूसरी की बारी आई तो मशीन ने रोक दी प्रक्रिया:
रामपुर शहर के खारी कुआं निवासी जुबैर इल्यास की जुड़वां बेटियां तूबा और खिजरा हैं, दोनों बहनें पढ़ते-पढ़ते हाईस्कूल तक पहुंच गईं, जुबैर ने पहले बेटी तूबा का आधार कार्ड बनवा लिया था| जब दूसरी बेटी खिजरा का आधार बनवाने की बारी आई तो बायोमीट्रिक जांच के दौरान मामला अटक गया| आधार केंद्र पर खिजरा की रेटिना और फिंगरप्रिंट स्कैन किये गये, लेकिन सिस्टम ने उसे डुप्लीकेट पैटर्न के रूप में पहचान लिया और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी| सेंटर संचालक ने परिवार को बताया कि मशीन दोनों के बायोमीट्रिक पैटर्न में समानता के कारण प्रक्रिया रोक रही है, जुबैर ने हार नहीं मानी, उन्होंने दूसरे आधार केंद्रों पर भी कोशिश की, उम्मीद थी कि कहीं न कहीं तकनीकी अड़चन दूर हो जायेगी लेकिन कहानी हर जगह लगभग वही रही| बायोमीट्रिक सिस्टम दोनों बहनों की पहचान को अलग-अलग दर्ज करने में अटकता रहा, यहीं से एक पिता की चिंता बढ़ने लगी|

कुदरत के सामने तकनीक हुई फैल:
आमतौर पर किसी व्यक्ति की पहचान तय करने के लिये फिंगरप्रिंट को बेहद महत्वपूर्ण बायोमीट्रिक पहचान माना जाता है| इसी भरोसे पर दुनिया भर में फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल पहचान के लिये लंबे समय से किया जाता रहा है| लेकिन तूबा और खिजरा के मामले ने एक असाधारण स्थिति पैदा कर दी| जुड़वां बहनों की समानता सिर्फ चेहरे तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी बायोमीट्रिक पहचान ने भी सिस्टम को चुनौती दे दी| करीब तीन महीने तक आधार कार्ड का मामला अटका रहा, आखिरकार जुबैर इल्यास अपनी बेटियों के भविष्य की चिंता लेकर DM अजय कुमार द्विवेदी के कार्यालय पहुंचे| आम फरियादियों की कतार में खड़े जुबैर ने जब अपनी समस्या बताई तो मामला सुनकर अधिकारी भी हैरान रह गये| सवाल सिर्फ एक आधार कार्ड का नहीं था, सवाल था—अगर सिस्टम दोनों बहनों को अलग-अलग पहचान ही नहीं पा रहा, तो उनकी पढ़ाई और आगे की जरूरी प्रक्रियाएं कैसे पूरी होंगी?

दिल्ली से लखनऊ तक चली कोशिश:
DM ने मामले को गंभीरता से लिया, स्थानीय स्तर पर समाधान संभव नहीं होने पर उन्होंने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अधिकारियों से संपर्क किया| मामला उच्च स्तर तक पहुंचा, DM ने UIDAI के CEO से संपर्क किया, जिसके बाद लखनऊ मुख्यालय को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये गये।,इसके बाद लगातार फॉलोअप किया गया|आखिरकार विशेष परिस्थितियों के लिये निर्धारित अपवाद नियम के तहत दोनों बहनों के आधार कार्ड जारी कराने का रास्ता निकाला गया|

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