झारखंड: हजारीबाग के बड़कागांव में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना की फाइल एक बार फिर खुल गई है, जिसमें एक नाबालिग बच्ची को कथित तौर पर गर्म आयरन (इस्त्री) से दाग दिया गया था| तत्कालीन BDO राकेश कुमार को मामले से बचाने के लिए लीपापोती की साजिश को सरकार ने एक झटके में खत्म कर दिया है| पूर्व जांच अधिकारी द्वारा दी गई ‘क्लीन चिट रिपोर्ट’ को सरकार ने खारिज कर दिया है| सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रशासनिक सेवा में बैठे किसी भी अधिकारी के लिए यह पैंतरेबाजी अब नहीं चलेगी| समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई कि पूर्व की जांच में साक्ष्यों और गवाहों का नियमानुकूल परीक्षण या प्रतिपरीक्षण तक नहीं कराया गया था| सरकार ने दो टूक में स्पष्ट किया है कि यह राहत ‘गुण-दोष’ के आधार पर नहीं, बल्कि केवल आपसी समझौते की बैसाखी पर मिली है, जिसे प्रशासनिक अनुशासन और न्याय की कसौटी पर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है|
नियम-17 के तहत नए सिरे से होगी जांच:
झारखंड सरकार ने नियमावली 2016 के नियम-18 (1) के तहत पूर्व के संदेहास्पद जांच प्रतिवेदन को पूरी तरह खारिज कर दिया है| साथ ही, नियम-17 के अधीन एक बार फिर से पारदर्शी प्रक्रिया के साथ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है| इसकी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव, नेहा अरोड़ा को मामले का संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है| वहीं हजारीबाग के अपर समाहर्ता महेंद्र छोटन उरांव को उपस्थापन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है|
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!