Home झारखंडबिहार का शराबबंदी कानून झारखंड में लागू नहीं हो सकता: उच्च न्यायालय

बिहार का शराबबंदी कानून झारखंड में लागू नहीं हो सकता: उच्च न्यायालय

by Munna Pathak

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने शराब की अवैध ढुलाई मामले में जब्त वाहन को लेकर अहम निर्णय दिया है| कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 बिहार राज्य का कानून है और उसे झारखंड में लागू नहीं किया जा सकता| बोकारो के पिंड्राजोरा थाना कांड संख्या 18/2026 से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने वाहन की जब्ती के आधार पर राहत से इनकार करने वाले निचली अदालतों के आदेश पर भी सवाल उठाया|

145 कार्टन शराब बरामदगी के बाद जब्त हुआ था वाहन:
मामला एक व्यावसायिक पिकअप वाहन से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर शराब की ढुलाई के आरोप में जब्त किया था| पुलिस के अनुसार वाहन से 750 एमएल की बोतलों वाले 145 कार्टन बरामद किए गए थे| वाहन के मालिक रितेश प्रधान ने इसे रिलीज कराने के लिए न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आवेदन दिया था| हालांकि 25 मई 2026 को न्यायिक दंडाधिकारी, बोकारो ने आवेदन खारिज कर दिया| इसके बाद वाहन मालिक ने सत्र न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहां भी 27 जून 2026 को राहत नहीं मिली|

निचली अदालत के आदेश में बिहार के कानून का हवाला:
सत्र न्यायालय ने बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का हवाला देते हुए माना था कि अवैध शराब की ढुलाई में इस्तेमाल वाहन जब्ती की कार्रवाई के दायरे में आ सकता है, इसी आधार पर वाहन को रिलीज नहीं किया गया| इसके बाद वाहन मालिक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि वाहन को लेकर वास्तविक रूप से कोई जब्ती की कार्यवाही शुरू नहीं हुई है| साथ ही, वाहन फाइनेंस पर लिया गया है और लंबे समय तक खड़े रहने से उसके खराब होने की आशंका है|हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार का मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम बिहार राज्य का कानून है| झारखंड में उसकी वैधानिकता के आधार पर वाहन को जब्त रखने का सवाल अलग से देखा जाना होगा| कोर्ट ने बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया कि वे उपायुक्त से रिपोर्ट प्राप्त कर यह पता करें कि संबंधित वाहन के खिलाफ वास्तव में जब्ती की कार्यवाही शुरू हुई है या नहीं|

कार्रवाई नहीं हुई तो शर्तों के साथ वाहन होगा रिलीज:
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि वाहन के संबंध में जब्ती की कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, तो वाहन संख्या JH-05-DF-9463 को न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा तय की जाने वाली उचित शर्तों के साथ उसके मालिक को रिलीज किया जाए| इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने क्रिमिनल मिसलेनियस पेटिशन संख्या 2579/2026 का निपटारा कर दिया|

आदेश से उठा कानूनी सवाल:
इस फैसले में हाईकोर्ट की टिप्पणी का मुख्य बिंदु यह है कि किसी दूसरे राज्य में लागू राज्य कानून को उसी रूप में झारखंड में लागू नहीं किया जा सकता| हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि झारखंड में शराब की अवैध ढुलाई से संबंधित मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो सकती| कार्रवाई के लिए झारखंड में लागू संबंधित कानून और उसकी वैधानिक प्रक्रिया का आधार होना आवश्यक है|

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

You may also like

Leave a Comment