रांची: झारखंड में टूटेगा मानव तस्करी का नेटवर्क, लापरवाही बरतने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को होगी 06 महीने से लेकर 02 वर्षों तक की सजा| झारखंड के ग्रामीण इलाकों और सुदूर जनजातीय अंचलों में मासूमों को झूठे सपनों के जाल में फंसाकर तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी| केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नए आपराधिक कानूनों और अत्याधुनिक तकनीक के बल पर मानव तस्करी के खिलाफ एक व्यापक अभियान की नींव रखी है| इस पहल के तहत झारखंड जैसे राज्यों में फैले तस्करी के तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करने का खाका तैयार किया गया है|
लापरवाही बरतने वाले धिकारियों पर होगी कार्रवाई:
नए कानूनी नियमों के तहत यदि कोई लोक सेवक (पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी) तस्करी की जानकारी मिलने के बाद भी मामला दर्ज करने या कार्रवाई करने में लापरवाही बरतता है या इसमें शामिल पाया जाता है, तो उसे 06 महीने से 02 साल तक की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा, साथ ही विभागीय जांच के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी|
संगठित अपराध सिंडिकेट पर निशाना:
केंद्रीय गृह मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों से अक्सर यह खबर सामने आती है कि किसी किशोरी या युवक को अच्छे काम और बेहतर जिंदगी का झांसा देकर बड़े शहरों में बेच दिया गया| ईंट-भट्टों, पत्थर खदानों या घरेलू काम के नाम पर होने वाला यह शोषण सालों से जारी रहा है| भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के पूरी तरह लागू होने के बाद अब कानूनी शिकंजा बेहद सख्त हो चुका है| अब पुलिस का ध्यान केवल छोटे-मोटे बिचौलियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धारा 111 के तहत संगठित अपराध सिंडिकेट को निशाना बनाया जाएगा| इसका सीधा असर यह होगा कि पर्दे के पीछे बैठकर करोड़ों का काला कारोबार चलाने वाले मुख्य मास्टरमाइंड और उनके फाइनेंशियर्स की संपत्तियां जब्त की जाएंगी|
तकनीक बनेगी हथियार:
तस्करी और शोषण के शिकार हुए पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए आधुनिक तकनीक को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है| अब चैट, ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन और मोबाइल लोकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में अदालत में सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा| तलाशी और बचाव अभियान के समय ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य कर दिया गया है| यह वीडियो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए एक मजबूत डिजिटल ढाल का काम करेगा| शोषण का शिकार हुईं महिलाओं और बच्चों को बार-बार अदालत या पुलिस के चक्कर लगाकर मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े, इसके लिए महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा ऑडियो-वीडियो माध्यम से बयान दर्ज करने का प्रावधान किया गया है|
मानव तस्करी रोधी इकाइयों को मिलेगी ताकत:
राज्य की मानव तस्करी रोधी इकाइयों को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर उन्हें धरातल पर सक्रिय टास्क फोर्स के रूप में तैनात किया जाएगा| केवल महिलाओं और बच्चों ही नहीं, बल्कि ईंट-भट्टों और अवैध कारखानों में बंधुआ-मजदूरी के शिकार बनने वाले पुरुषों और लड़कों की पहचान के लिए भी विशेष जांच अभियान चलाए जाएंगे| चेहरे की पहचान करने वाले राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली और राष्ट्रीय डेटाबेस की मदद से गायब हुए बच्चों और पीड़ितों की पहचान तुरंत की जा सकेगी| इसके साथ ही सीमा पार या अंतर-राज्यीय तस्करी को रोकने के लिए विशेष संयुक्त जांच टीमें गठित की जाएंगी|
साइबर धोखाधड़ी और विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी पर रोक:
हाल के दिनों में विदेश में आकर्षक नौकरी का लालच देकर युवाओं को साइबर-धोखाधड़ी केंद्रों में फंसाने के मामले सामने आए हैं| इसे रोकने के लिए स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए अनिवार्य जांच तंत्र स्थापित किया जाएगा| बिना वैध लाइसेंस के चलने वाली या अवैध रास्तों से लोगों को विदेश भेजने वाली फर्जी एजेंसियों को तुरंत बंद कर उनके संचालकों पर आजीवन कारावास जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी|
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