झारखंड: आदिवासी बहुल सिमडेगा जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय का सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम बनने की और अग्रसर है| आर्थिक तंगी, अशिक्षा और कानूनी जानकारी के अभाव में कई ग्रामीण छोटे-छोटे मामलों में उलझ जाते हैं और लंबे समय तक पुलिस और न्यायालय का चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं| ऐसे लोगों के लिए लोक अदालत राहत का माध्यम साबित हो रही है| शनिवार, 12 सितंबर को सिमडेगा में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, इसमें विभिन्न प्रकार के मामलों के त्वरित और आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन का प्रयास किया गया|
लोक अदालत में कुल सात बैचों के माध्यम से छह हजार से अधिक मामलों के निष्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है| ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार जानकारी के अभाव या परिस्थितिजन्य कारणों से लोग कानूनी विवादों में फंस जाते हैं| वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में बने रहना कठिन होता है| ऐसी स्थिति में लोक अदालत उन्हें बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के मामलों के समाधान का अवसर उपलब्ध कराती है| सिमडेगा के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को सुलभ और त्वरित न्याय मिलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी सहजता से दिलाने का प्रयास किया जा रहा | उन्होंने कहा कि लोक अदालत समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है| सिमडेगा जैसे ग्रामीण और आदिवासी बहुल जिले में लोक अदालत की यह पहल लोगों के लिए न्याय पाने की राह को आसान करेगी|
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