पटना : राज्य में लापता, गुमशुदा एवं अपहृत बच्चों को तलाशने और बरामद करने के उद्देश्य से बिहार अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के कमजोर वर्ग प्रभाग ने व्यापक पहल शुरू की है| इस पहल के तहत इस वर्ष 20 अगस्त से 10 सितंबर तक राज्यभर में विशेष अभियान ऑपरेशन तलाश चलाया जा रहा है| इस योजना के तहत लापता, गुमशुदा एवं अपहृत बच्चों के हितों तथा इस संवेदनशील मुद्दे को ध्यान में रखते हुए इस अभियान का नाम “ऑपरेशन तलाश” रखा गया है| पुलिस मुख्यालय के स्तर से जारी सूचना के मुताबिक, राज्य के पुलिस थानों की तरफ से 2 सितंबर तक “मिशन वात्सल्य पोर्टल” पर कुल 2 हजार 254 लापता बच्चों के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं| इस अवधि के दौरान कुल 3 हजार 359 बच्चों को तलाशा गया, जबकि पोर्टल पर 2 हजार 787 बच्चों का मिलान किया गया| इनमें लापता बच्चों के रूप में दर्ज 388 लड़के और 1 हजार 865 लड़कियां, बरामद किए गए 652 लड़के और 2 हजार 705 लड़कियां, तथा पोर्टल पर मिलान किए गए 483 लड़के और 2,303 लड़कियां शामिल हैं| मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल 6,857 बच्चों को तलाशा गया है, जबकि 4,273 बच्चों का मिलान किया जा चुका है|
अभियान के तहत 20 अगस्त, 2026 से लापता, अनट्रेस एवं अपहृत बच्चों की पहचान करने तथा उनकी बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है| 20 अगस्त से 10 सितंबर के बीच “मिशन वात्सल्य पोर्टल” पर बच्चों से संबंधित आंकड़ों को अपडेट एवं दुरुस्त किया जा रहा है| बरामद किए गए बच्चों का पूरा विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है, ताकि उन बच्चों की जानकारी, जो वास्तव में अभी तक बरामद नहीं हुए हैं, सही रूप से प्रदर्शित हो सके|
विवाह के उद्देश्य से किए गए अपहरण से संबंधित सभी लंबित मामलों का सत्यापन किया जा रहा है और अपहृत बच्चों की बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं| पहले ही बरामद किए जा चुके बच्चों के बयान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए जा रहे हैं|
किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के साथ समन्वय स्थापित कर संबंधित आंकड़ों को अपडेट एवं संशोधित किया जा रहा है| कानून के उल्लंघन के आरोपी बच्चों (चिल्ड्रेन इन कॉफ्लिक्ट वीथ लॉ) से संबंधित लंबित मामलों में समय पर सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट (सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट – एसबीआर) दाखिल की जा रही हैं| वहीं, मुख्य मामलों में आरोप-पत्र निर्धारित समय-सीमा के भीतर किशोर न्याय बोर्डों के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं|
अभियान के दौरान संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) और बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद पर्यवेक्षण गृह, रिमांड होम और बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) का दौरा किया जा रहा है| इन संस्थानों में रह रहे कानून के उल्लंघन के आरोपी बच्चों (सीआईसीएल) तथा देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) से बातचीत कर उन्हें उचित मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान किया जा रहा है|
“ऑपरेशन तलाश” अभियान का संचालन विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) के नोडल अधिकारी / पुलिस उपाधीक्षक (विशेष अपराध) के नेतृत्व में संयुक्त रूप से किया जा रहा है| इसमें पुलिस थानों में कार्यरत महिला एवं बाल कल्याण हेल्प डेस्क के पदाधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ), मानव तस्करी निरोधक इकाई (एएचटीयू) के पदाधिकारी, महिला थाना प्रभारी तथा पुलिस दीदियां (अभया ब्रिगेड) भाग ले रही हैं| हजार 254 लापता बच्चों के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं| इस अवधि के दौरान कुल 3 हजार 359 बच्चों को तलाशा गया, जबकि पोर्टल पर 2 हजार 787 बच्चों का मिलान किया गया| इनमें लापता बच्चों के रूप में दर्ज 388 लड़के और 1 हजार 865 लड़कियां, बरामद किए गए 652 लड़के और 2 हजार 705 लड़कियां, तथा पोर्टल पर मिलान किए गए 483 लड़के और 2,303 लड़कियां शामिल हैं| मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल 6,857 बच्चों को तलाशा गया है, जबकि 4,273 बच्चों का मिलान किया जा चुका है|
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