Home झारखंडभ्रष्टाचार का उदाहारण बना कटकमसांडी अंचल कार्यालय

भ्रष्टाचार का उदाहारण बना कटकमसांडी अंचल कार्यालय

by Munna Pathak

हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमसांडी अंचल कार्यालय से जारी अलग-अलग भूमि प्रतिवेदनों ने झारखंड सरकार के सरकारी कार्य प्रणाली एवं भूमि सत्यापन प्रक्रिया का पोल खोलकर रख दिया है| अंचल कर्यालय पर आरोप है कि एक ही खाता और प्लॉट की जमीन के संबंध में तीन से चार महीने के बीच दो अलग-अलग प्रतिवेदन जारी कर दिये गए| एक जमीं को निजी बताते हुए उसपर सरकारी योजना की स्वीकृति दी गई, जबकि दूसरे मामले उसी जमीन को सरकारी बताते हुए उस पर सामुदायिक भवन का निर्माण करा दिया गया| इस मामले ने अंचल कार्यालय की कार्यशैली का पोल खोलकर रख दिया है साथ ही सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और सरकारी धन के सही इस्तेमाल पर भी सवाल खड़ा कर दिया है|मामला कटकमसांडी प्रखंड के बहरवा गधा गांव का है, जानकारी के अनुसार भूमि संरक्षण विभाग ने बालकृष्ण राय के नाम पर स्थित तालाब के गहरीकरण के लिए 1,66,900 रुपये की योजना को स्वीकृति दी| इस योजना के लिए कटकमसांडी अंचल कार्यालय से जारी भूमि प्रतिवेदन के आधार पर तालाब को निजी भूमि बताते हुए योजना को स्वीकृति दी गई| वहीं दूसरी ओर, जिला परिषद की ओर से इसी भूमि के एक हिस्से पर सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है| इसके लिए तैयार भूमि प्रतिवेदन में उसी जमीन के हिस्से को सरकारी भूमि मानते हुए निर्माण कार्य कराया गया और भुगतान भी कर दिया गया|

एक ही जमीन निजी भी और सरकारी भी

प्रश्न यही है कि अगर एक ही खाता और प्लॉट की भूमि का एक हिस्सा निजी माना गया है तो उसी भूमि का दूसरा हिस्सा सरकारी कैसे घोषित कर दिया गया| अगर जमीन सरकारी थी तो निजी व्यक्ति के नाम पर तालाब गहरी करण की योजना कैसे स्वीकृत हु| अगर निजी थी तो सरकारी भवन निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई, इन विरोधाभासी प्रतिवेदनों ने अंचल कार्यालय की भूमिका और भ्रष्टाचार पर सवाल पैदा कर दिया है|

खतियान और भूमि अभिलेख भी बने विवाद का आधार
शिकायतकर्ता धीरज कुमार सिंह के अनुसार संबंधित भूमि खाता संख्या-26, प्लॉट संख्या-6, रकबा 6.38 डिसमिल है जो खतियान में सुभाष राय के नाम दर्ज है| भूमि का प्रकार गैर मजरूआ खास बताया गया है, इसकी रसीद भी निर्गत होती रही है| उनका आरोप है कि इसी भूमि के एक हिस्से में तालाब है, जबकि दूसरे हिस्से पर सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है| ऐसे में एक ही भूमि के संबंध में दो अलग-अलग प्रकार के भूमि प्रतिवेदन जारी किया जाना गंभीर अनियमितता का संकेत देता है|

मामले को सामने लाने वाले धीरज कुमार सिंह ने उपायुक्त (DC), उप विकास आयुक्त, जिला परिषद और भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है| उनका कहना है कि अगर जांच हुई तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर किस आधार पर एक ही भूमि के लिए दो अलग-अलग प्रतिवेदन जारी किए गए और किन परिस्थितियों में सरकारी योजनाओं की स्वीकृति एवं भुगतान किया गया| अगर जांच में यह साबित होता है कि भूमि प्रतिवेदन तथयात्मक रूप से गलत तैयार किए गए, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सरकारी राशि के दुरुपयोग और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का भी विषय बनेगा| इस संबंध में पूछे जाने पर कटकमसांडी के अंचलाधिकारी अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि संबंधित फाइल देखने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी देंगे|

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

You may also like

Leave a Comment