रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा थाने द्वारा एक नाबालिग को कथित तौर पर अवैध हिरासत में लेने और उम्र विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है| कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद थाने का सीसीटीवी फुटेज पेश न कर पाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है और अब इस मामले में राज्य के गृह सचिव तथा डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तलब किया है|
CCTV फुटेज पर थाना प्रभारी बेबस:
सुनवाई के दौरान जब डोरंडा थाना प्रभारी अदालत के आदेश के बावजूद घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं कर सके, तो मामला और गरमा गया| थाना प्रभारी की तरफ से दलील दी गई कि सीसीटीवी खराब था, इस पर बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रांची शहर की सड़कों, मुख्य चौराहों और थानों में कैमरों का सुचारू रूप से काम करना बेहद जरूरी है|
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता फिरोज अंसारी व अन्य की ओर से दायर हेबियस कॉरपस याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने 4 सितंबर को उनके बच्चे को अवैध रूप से हिरासत में लिया और परिजनों द्वारा जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) देकर उम्र 18 साल से कम होने की बात बताने के बावजूद, उसकी उम्र 19 साल दर्शाकर 8 सितंबर को जुडिशियल रिमांड पर भेज दिया| कोर्ट ने प्रार्थी को पुलिस द्वारा बच्चे को रिमांड पर भेजे जाने के कदम को नई याचिका के जरिए चुनौती देने की छूट दे दी है|
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