पलामू : झारखंड के पलामू जिले के लेस्लीगंज प्रखंड स्थित लोटवा गांव में गरीबी से तंग आकर एक मां के द्वारा अपने नवजात शिशु को 50 हजार रूपये में बेचने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है| आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू के उपायुक्त (डीसी) को आदेश जारी कर इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है|सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार लोटवा गांव की रहनेवाली पिंकी देवी, (पति रामचंद्र राम) को अपनी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अपने नवजात बच्चे को आर्थिक मज़बूरी में बेचने को मजबूर होना परा था| पीडिता के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे बुनियादी दस्तावेज नहीं होने की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था| परिवार के पास रहने को मकान नहीं था जिस वजह से पीडिता स्थानीय मंदिर के शेड में रहने को मजबूर थी| शिकायतकर्ता ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 (मानव दुर्व्यापार व बंधुआ मजदूरी पर रोक) का गंभीर उल्लंघन और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही बताते हुए आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी|| आयोग ने मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है|
27 अप्रैल और 13 अगस्त को आयोग की बैठक में इस मामले की समीक्षा की गई| आयोग ने माना कि कागजी दस्तावेज और विभिन्न कार्ड तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन क्या वास्तव में पीड़ित परिवार को सामाजिक कल्याण योजनाओं का नकद व अन्य प्रत्यक्ष लाभ मिलना शुरू हुआ है? इसका कोई ठोस या दस्तावेजी प्रमाण रिपोर्ट के साथ संलग्न नहीं किया गया था| आयोग के सहायक रजिस्ट्रार (विधि) ब्रिजवीर सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार, पलामू उपायुक्त को 20 सितंबर तक अतिरिक्त और पूर्ण रिपोर्ट सौंपने का अंतिम अवसर आयोग द्वारा दिया गया है|
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