नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा आयोजित दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम आज संपन्न हो गया, जिसमें 95 विश्वविद्यालय-स्तरीय छात्रों ने भाग लिया| यह इंटर्नशिप 14 सितम्बर, 2026 को प्रारम्भ हुई थी, देश के 19 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों से प्राप्त 1008 आवेदनों में से इन इंटर्नों का चयन किया गया था| समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन षड़ंगि ने प्रशिक्षुओं को कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी| उन्होंने कहा कि यह दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण शिक्षण अनुभव रहा है| उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि उनके प्रयास व्यर्थ न जाएं| उन्होंने “प्रचार करें, अभ्यास करें और प्रदर्शन करें ”के महत्व पर बल देते हुए कहा कि मानव अधिकारों के बारे में सीखना जीवनभर जारी रहना चाहिए तथा अर्जित ज्ञान को व्यवहार में लाना और दूसरों के साथ साझा करना आवश्यक है|
न्यायमूर्ति षड़ंगि ने प्रशिक्षुओं से अपने दैनिक जीवन में मानव अधिकार मूल्यों का प्रदर्शन करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों सहित सभी लोगों के प्रति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रहें तथा उनकी आवश्यकताओं के प्रति उचित ध्यान दें| उन्होंने कहा कि देश और समाज के विकास के लिए युवाओं से बहुत अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं| प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने कहा कि इंटर्नशिप का समापन किसी अंत का नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत का प्रतीक है| उन्होंने प्रशिक्षुओं से मानव अधिकारों, संविधान और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने का आग्रह किया| उन्होंने कहा कि मानव अधिकार केवल अधिकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे गरिमा, न्याय, करुणा और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व से जुड़े हैं, जिन्हें जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए|
मानव अधिकारों और देशभक्ति को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए श्रीमती सयानी ने प्रशिक्षुओं से संविधान का सम्मान करने, मानव गरिमा की रक्षा करने, कमजोर एवं वंचित वर्गों की सेवा करने तथा न्याय के पक्ष में खड़े होने का आह्वान किया| वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपने समुदायों में मानव अधिकार दूत बनने का आग्रह किया| उन्होंने कहा कि ज्ञान, करुणा और सेवा ऐसे मार्ग-दर्शक सिद्धांत हैं, जिनके माध्यम से एक सशक्त, न्यायपूर्ण और मानवीय भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है| अपने संबोधन में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के महासचिव पीयूष गोयल ने प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए कहा कि दैनिक जीवन में मानव गरिमा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है| उन्होंने कहा कि शैक्षणिक शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब उसे व्यवहार में उतारा जाए| टीमवर्क और संचार कौशल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित टीम गतिविधियों ने प्रतिभागियों में टीम भावना तथा सहयोगात्मक कार्य-कौशल का विकास किया है| उन्होंने प्रशिक्षुओं से समाज में मानव अधिकारों के व्यावहारिक पक्षों के प्रति अधिक जागरूकता फैलाकर मानव अधिकारों के मशालवाहक बनने का आह्वान किया|
इससे पूर्व, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के संयुक्त सचिव समीर कुमार ने इंटर्नशिप कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षुओं को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्यों, आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रख्यात विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, कोर ग्रुप के सदस्यों तथा नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद करने का अवसर मिला| उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यक्रम ने प्रशिक्षुओं की मानव अधिकारों के प्रति समझ और समृद्ध होगा|उन्होंने पुस्तक समीक्षा, समूह शोध परियोजना प्रस्तुति तथा वाद-विवाद, भाषण सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा की, कार्यक्रम के अंत में श्रीमती मोनिका जून ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया|
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