Home इधर-उधरकेरलम के मलप्पुरम जिला अनोखी पहचान के लिये दुनिया में चर्चित

केरलम के मलप्पुरम जिला अनोखी पहचान के लिये दुनिया में चर्चित

by Munna Pathak

केरलम: आप किसी गांवकी सड़कों पर निकलें और सामने से गुजरते हर चेहरों में आपको एक जैसा चेहरा नजर आये! स्कूल जाते बच्चे हों या बाजार घूमते लोग, कई चेहरे एक ऐसे लगें जैसे एक ही तस्वीर की दो प्रतियाँ हों| सुनने में यह किसी फिल्म का दृश्य लगता हो लेकिन केरलम के मलप्पुरम जिले का कोडिन्ही गांव इस अनोखी पहचान के लिये दुनिया भर में चर्चित रहा है| यहां बड़ी संख्या में जुड़वां बच्चे जन्म लेते हैं, इसी वजह से इसे अक्सर भारत के ‘ट्विन टाउन’ के नाम से जाना जाता है|

छोटा गांव,जुड़वां बच्चों के आंकड़े बड़े:
कोडिन्ही की आबादी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन यहां जुड़वां बच्चों की संख्या लंबे समय से लोगों का ध्यान खींचती रही है| बताये गये आंकड़ों के मुताबिक, गांव में करीब 2,000 परिवार रहते हैं, यहां लगभग 400 से 550 जुड़वां जोड़े बताये जाते हैं| प्रति 1,000 डिलीवरी पर करीब 42 से 45 जुड़वां जन्म होने की बात कही जाती है| खास बात यह है कि यह सिलसिला दशकों से जारी बताया जाता है|यानी गांव में किसी परिवार में जुड़वां बच्चों का जन्म होना अब वहां के लोगों के लिए कोई असाधारण बात नहीं रह गई है|

आखिर क्यों होते हैं इतने जुड़वां?
यही सवाल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है| भारत और विदेश के शोधकर्ताओं ने कोडिन्ही में इसके संभावित कारणों को समझने की कोशिश की| पानी, खान-पान, पर्यावरण और जीवन-शैली जैसे कई पहलुओं पर अध्ययन किये गये| दुनिया के कुछ क्षेत्रों में खान-पान को जुड़वां बच्चों के जन्म से जोड़कर देखा गया है, लेकिन कोडिन्ही के मामले में अब तक ऐसा कोई एक कारण सामने नहीं आया, जिसे वैज्ञानिक अंतिम जवाब मान सकें| जेनेटिक कारण को संभावित वजहों में शामिल किया गया है, लेकिन इस गांव में जुड़वां जन्म की असामान्य दर का कोई सर्वमान्य और निर्णायक वैज्ञानिक स्पष्टीकरण अब तक स्थापित नहीं हुआ है|

यहां जुड़वां होना ‘अजूबा’ नहीं, पहचान है:
बाहर से आने वालों के लिये कोडिन्ही किसी रहस्यमयी दुनिया से कम नहीं लगता, लेकिन गांव के लोगों के लिये यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है| इसी खास पहचान को संभालने और जुड़वां बच्चों के परिवारों को एक साथ लाने के लिये 2008 में ‘ट्विन्स एंड किन्स एसोसिएशन’ की शुरुआत की गई| यह संस्था जुड़वां बच्चों से जुड़ी जानकारी जुटाने के साथ-साथ उनके माता-पिता को परवरिश और जरूरतों से जुड़ी सलाह व सहयोग देने का काम करती है| कोडिन्ही की गलियों में एक जैसे चेहरे देखकर भले ही बाहर से आने वाले लोग हैरान हो जायें, लेकिन यहां के लोगों के लिये यह कोई तमाशा नहीं है| उनके लिये ये चेहरे उनकी पहचान, अपनापन और प्रकृति का अनोखा उपहार है|

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