पटना : पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में बाघों की अहम भूमिका है| बाघों का संरक्षण सिर्फ एक वन्यजीव को सुरक्षित करने के नाते जरूरी नहीं है| बल्कि, बाघों का संरक्षण आने वाली पीढ़ीयों को इनके बाड़े बेहतर जानकारी देने और दिखाने के लिए भी बेहद आवश्यक है| इस बात की चर्चा प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने 28 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय ब्याघ्र दिवस के अवसर पर स्थानीय पटना जू के थ्री- डी थिएटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किया| इस अवसर पर मंत्री ने पटना जू में जन्म लिए चार बाघ शावकों का नामकरण क्रमशः रूद्र, तेजस, पूर्णिमा और श्रृष्टि के रूप में किया|इस कार्यक्रम में राज्य जैव विविधता पर्षद के अध्यक्ष भरत ज्योति ने कहा कि बाघ संरक्षण के क्षेत्र में पटना जू का योगदान उल्लेखनीय रहा है| पिछले 53 वर्षों में यहां 53 बाघों का पालन-पोशन किया गया, इनमें 36 बाघों का जन्म पटना जू में ही हुआ था| जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित करना भी हमारी सामुहिक जिम्मेदारी है|
सफेद बाघों के संरक्षण में बिहार देश में दूसरे स्थान पर : निदेशक
जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने स्वागत भाषण के दौरान कहा कि बाघ पारिस्थितिकी तंत्र की खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| वर्ष 2006 में भारत में बाघों की संख्या 1 हजार 411 थी, जो 2010 में बढ़कर 1 हजार 706 और वर्ष 2022 की गणना में इनकी संख्या बढ़कर 3 हजार 682 तक पहुंच गई| सफेद बाघों के संरक्षण मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है|इस मौके पर मंत्री ने चिड़ियाघर और वन्यजीवों की बेहतर देखभाल करने वाले कर्मियों की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया| चित्रांकन प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भी पुरस्कार प्रदान किया गया| मंत्री ने जू प्रशासन से ऐसे सराहनीय कार्य करने वाले कर्मचारियों और बच्चों को समय-समय पर प्रोत्साहित करते रहने की अपील की|आयोजित कार्यक्रम में विभाग के विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास) अमित कुमार उपस्थित थे|
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