साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में फाइलों में योजनाएं बनती रहीं लेकिन साहिबगंज के गांवों की तक़दीर और तस्वीर आज तक नहीं बदली| वर्ष 2012 में जिस ‘मेधा पेय जलापूर्ति योजना’ को ग्रामीणों के गले से आर्सेनिक और फ्लोराइड का जहर हटाने के लिए शुरू होना था, वह आज डेढ़ दशक बाद भी सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है| इस घोर प्रशासनिक लापरवाही पर झारखंड हाई कोर्ट ने करा रुख अख्तियार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर 2026 का दिन तय किया है|
लोगों की जिंदगी पर भारी जहरीला पानी:
प्रार्थी सिद्धेश्वर मंडल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत के सामने जो हकीकत आई, वह रोंगटे खड़े करने वाली है| खुद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुहर लगाई है कि इलाके के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर पर है| ग्रामीण रोज ऐसा पानी पीने को मजबूर हैं, जो धीरे-धीरे उनकी सेहत को खोखला कर रहा है|
कोर्ट ने प्रधान सचिव से पूछा तारीख बताइए:
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस लेट-लतीफी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को कटघरे में खड़ा किया है| अदालत ने दो टूक शब्दों में जवाब मांगा है कि आखिर यह योजना कब तक चालू होगी| मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय की गई है, जहां सरकार को यह साफ करना होगा कि साहिबगंज के ग्रामीणों को साफ पानी का उनका बुनियादी हक कब नसीब होगा|
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