नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी), ने दस केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्य सचिवों/प्रशासकों को ‘कार्य-स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा’ पर एक परामर्शी जारी की है|एनएचआरसी का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कानूनों के अस्तित्व के बावजूद, कार्य-स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा आज भी चिंता का विषय बनी हुई है| भारत में हाल ही में किए गए आवधिक श्रम बल भागीदारी सर्वेक्षण के अनुसार, सितंबर 2026 में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 34.6 प्रतिशत रही| हालांकि, वर्ष 2026 में प्रकाशित राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के लगभग 4.4 लाख मामले भी दर्ज किए गए हैं| ये आंकड़े महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बनी हुई चुनौतियों को रेखांकित करते हैं और इस दिशा में निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की आवश्यकता को उजागर करते हैं|एनएचआरसी मानता है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके न्याय और समान अवसरों के संवैधानिक अधिकारों की पूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है| आयोग ने कहा है कि कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उन्हें कार्य-बल में पूर्ण रूप से भाग लेने तथा अपनी क्षमताओं का पूरा एहसास करने में सक्षम बनाने के लिए एक अनिवार्य शर्त है|
रेलवे बोर्ड के अलावा, जिन केंद्रीय मंत्रालयों को यह परामर्शी भेजी गई है उनमें महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय शामिल हैं| एनएचआरसी की परामर्शी आठ प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है| इनमें महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न, बुनियादी ढांचा, प्रत्यक्ष दर्शियों के हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करना, पुलिस की भूमिका, पीड़ितों को सहायता, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध, दीर्घकालिक सुधार और अन्य उपायों जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाना शामिल है| एनएचआरसी ने सभी संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे परामर्शी में दी गई सिफारिशों को लागू करें तथा की गई प्रगति से आयोग को अवगत कराने के लिए दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) एनएचआरसी को समर्पित करें|
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