गोपालगंज: ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई जरी रखना आज भी एक बड़ी चुनौती है| कहीं आर्थिक तंगी तो कहीं सामाजिक परिस्थितियां और प्राकृतिक आपदाएं उनकी शिक्षा में बाधा बनती हैं| ऐसी चुनौतियों के बीच गोपालगंज जिले के कुचायकोट स्थित मध्य विद्यालय कन्या की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और पढ़ाई को रोचक बनाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है| पुष्पा प्रसाद ने पारंपरिक शिक्षण पद्धति के साथ गतिविधि आधारित पढ़ाई, कम लागत वाली शिक्षण सामग्री और डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया।|उनका प्रयास है कि बच्चे केवल किताबों में लिखे पाठ याद न करें, बल्कि उन्हें समझें और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें|
डिजिटल माध्यम ने आसान बनाई पढ़ाई:
विद्यालय में पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षिका ने डिजिटल संसाधनों और क्यूआर कोड आधारित शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल किया| भूमिका निभाने वाली गतिविधियों और अन्य रचनात्मक तरीकों के जरिए बच्चों को विषय समझाने का प्रयास किया गया| इस तरह की पहल उन छात्राओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जिन्हें घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन या मार्गदर्शन नहीं मिल पाता| विद्यालय में सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार करना और अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा से जोड़ना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है|
बालिका शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी ध्यान:
पुष्पा प्रसाद का काम केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है, छात्राओं के स्वास्थ्य, पोषण और मासिक धर्म स्वच्छता जैसे विषयों पर जागरूकता भी बालिका शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है| बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा और नियमित पढ़ाई बनाए रखना भी विद्यालय के सामने एक चुनौती है|ऐसे वातावरण में शिक्षिका की भूमिका केवल पाठ पढ़ाने वाली की नहीं, बल्कि बच्चों और अभिभावकों के बीच भरोसा कायम करने वाली मार्गदर्शक की भी बन जाती है|
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान:
पुष्पा प्रसाद का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए किया गया| शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने इन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया| यह उपलब्धि सरकारी विद्यालयों में नवाचार और बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान की मिशाल है|
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