रोहतास: जिले की अदालत ने न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने पर सख्त रुख अपनाते हुए रोहतास के तत्कालीन एसपी रौशन कुमार को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है| साथ ही अदालत ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशिक्षण प्रणाली पर कई गंभीर और अभूतपूर्व टिप्पणियां की हैं| रोहतास (सासाराम) के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है|एक आपराधिक मामले में रोहतास के तत्कालीन एसपी रौशन कुमार द्वारा अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन न करने और न्यायिक आदेशों के प्रति उदासीनता दिखाने पर अदालत ने यह कार्रवाई की है| अदालत ने आईपीएस अधिकारी की इस अनदेखी पर कार्रवाई के लिए बिहार के डीजीपी और मुख्य सचिव को भी पत्र भेजा था, हालांकि, शीर्ष स्तर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर अदालत को अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी पड़ी| मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने एसपी को अवमानना का दोषी ठहराते हुए एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया और इस आदेश की प्रति उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया|
अदालत की मुख्य टिप्पणियां:
अदालत ने केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को आदेश की प्रति भेजते हुए कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण ढांचे में बड़े बदलाव की सख्त जरूरत है| अफसरों को यह सिखाया जाना चाहिए कि वे एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम कर रहे हैं और न्यायपालिका के प्रति उनका जवाबदेह होना अनिवार्य है| न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह कदम जिला स्तर की अदालतों की गरिमा और सम्मान को बहाल करने के लिए अपरिहार्य हो गया था| स्टील फ्रेम कहे जाने वाले प्रशासनिक ढांचे के अधिकारी लगातार निचली अदालतों के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं| कोर्ट ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों द्वारा अदालती पत्राचार का जवाब तक न देना प्रशासनिक उदासीनता और न्यायपालिका के प्रति अनादर की भावना को परिलक्षित करता है|
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