पटना: बिहार के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक पशुपालन अब केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाला एक सफल उद्यम का रूप ले चुका है| वर्ष 2017 में स्थापित सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं करीब 49 हजार से भी अधिक जीविका दीदियों ने कठिन मेहनत और लगन के बदौलत दुग्ध उत्पादन और उसके खरीद-बिक्री के कारोबार को आज कारोड़ों में पहुंचाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखने का काम किया है| जीविका के अधिकारियों के अनुसार, सहरसा में कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी का गठन सितंबर 2017 में किया गया था, जबकि इसका व्यावसायिक संचालन अक्टूबर 2018 से प्रारंभ हुआ| शुरुआत में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में डेयरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना बनाई गई थी, जिसका बाद में खगड़िया और मुंगेर तक इसका विस्तार किया गया| इस कंपनी को बिहार जीविका से वित्तीय सहायता और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त है|
स्थापना के बाद से कंपनी ने अभूतपूर्व प्रगति की है, वर्ष 2019-20 में जहां कंपनी से 16,656 महिला सदस्य जुड़ी थीं, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या बढ़कर 49,344 हो गई है| यानी बीते सात वर्षों में सदस्य संख्या में करीब तीन गुना की वृद्धि हुई है| इसी अवधि में औसत दैनिक दूध संग्रह 11,436 किलोग्राम से बढ़कर 94,180 किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया है|
वर्तमान में 479 लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ कंपनी पांच जिलों के 53 प्रखंडों में 17 बल्क मिल्क कूलरों और 1,192 कार्यशील मिल्क प्रोक्योरमेंट प्वाइंट्स के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 92,218 किलोग्राम दूध का संग्रह कर रही है|कंपनी की आर्थिक मजबूती उसके कारोबार के आंकड़ों में साफ झलकती है| वित्तीय वर्ष 2019-20 में कंपनी का कुल टर्नओवर 16.54 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में लगभग 8.8 गुना बढ़कर 145.01 करोड़ रुपये पर पहुंच गया| चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक ही कंपनी 74.81 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है| कारोबार में हुई इस वृद्धि का सीधा लाभ महिला दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा है| किसानों को किया जाने वाला भुगतान 2019-20 के 14.38 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 113.10 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 8 गुना की बढ़ोतरी दर्शाता है|
कंपनी दूध संग्रह के साथ-साथ पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, मिनरल मिश्रण और हरा चारा जैसी सुविधाएं भी सदस्यों को उपलब्ध करा रही है| अगस्त 2026 तक सदस्यों द्वारा कुल 13.96 करोड़ किलोग्राम दूध की आपूर्ति की जा चुकी है| इस दौरान 1.97 लाख कृत्रिम गर्भाधान, 7,375 मीट्रिक टन पशु आहार, 129 मीट्रिक टन मिनरल मिश्रण और 139 मीट्रिक टन हरे चारे की आपूर्ति की गई है|
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!