Home आधी-आबादीबकरी पालन से जीविका दीदियों ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर

बकरी पालन से जीविका दीदियों ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर

by Munna Pathak

पटना: बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने में जीविका के स्वयं सहायता समूह आधारित मॉडल लगातार नए और प्रेरणादायक अवसर पैदा कर रहे हैं| इसी कड़ी में आज सीमांचल के चार जिलों अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में गुलाबी क्रांति (बकरी पालन और मांस उत्पादन) के जरिए जीविका दीदियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है| सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं करीब 20,हजार महिलाओं की एकजुटता ने मौजूदा समय में 15 करोड़ रुपये से अधिक के संचयी कारोबार के माध्यम से एक नया इतिहास रच दिया है| दिसंबर 2020 में स्थापित और सितंबर 2021 से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने वाली इस कंपनी ने बकरी पालन को एक संगठित और मूल्य-श्रृंखला आधारित व्यवसाय में बदलने का काम किया है| अगस्त 2026 तक कंपनी से 19,956 (लगभग 20,000) शेयरधारक जुड़ चुके हैं और कुल शेयर पूंजी 99.78 लाख रुपये तक पहुंच गई है|
आंकड़ों पर गौर करें तो सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ीं जीविका दीदियों की मदद से वित्तीय वर्ष 2021-22 में कंपनी का टर्नओवर 25.50 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 530.63 लाख रुपये (लगभग 5.31 करोड़ रुपये) हो गया| पिछले पांच वर्षों में वार्षिक टर्नओवर में 20 गुना से भी अधिक का इजाफा हुआ है| जीविका के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के चारों जिलों में बकरी पालन और मांस उत्पादन के कारोबार से वर्ष 2021-22 में किसानों को किया गया भुगतान 11.47 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 146.70 लाख रुपये हो गया है| वहीं, अगस्त 2026 तक कंपनी ने कुल 15.49 करोड़ रुपये का संचयी टर्नओवर दर्ज किया है और इससे सीधे उत्पादक महिलाओं को 5.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है|
अधिकारियों का यह भी कहना है कि कंपनी की तरफ से लाइव बॉडीवेट (जीवित वजन) के आधार पर पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाई गई है| प्रखंड स्तर पर खरीद-बिक्री को सुगम बनाने के लिए 44 डेमो सह कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं| गांव-गांव तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 700 से अधिक प्रशिक्षित पशु सखियों’ का नेटवर्क कार्यरत है| वर्ष 2025-26 में 2.15 लाख से अधिक डीवॉर्मिंग और 1.95 लाख से अधिक टीकाकरण सेवाएं दी गईं| इसके अलावा, सीमांचल जीविका मीट आउटलेट के माध्यम से अगस्त 2026 तक 14,566 किग्रा मांस की बिक्री कर 1.03 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया गया है|सीमांचल में बकरी पालन को संगठित बाजार और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर जीविका ने बिचौलियों की भूमिका खत्म की है और महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाया है| ग्रामीण विकास विभाग इस सफल मॉडल को राज्य के अन्य हिस्सों में भी आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है|

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