पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मानवीय दृष्टिकोण से इस बार गांधी जयंती केअवसर पर बिहार के अलग-अलग जेलों में बंद 44 कैदियों को रिहा करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है| इससे पूर्व वर्ष 2018 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर 43 कैदियों को जेलों से मुक्त किया गया था| आठ वर्ष बाद फिर से इस वर्ष गांधी जयंती पर बंदियों को रिहाई की जा रही है| इसके अलावा 2 अक्टूबर को अपराध से पीड़ित परिवारों के परिजनों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी| लगभग 1 हजार 820 लाभार्थी परिवारों के बीच करीब 3 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी|
इस वर्ष जेलों से छोड़ने जाने वाले कैदियों में बड़ी संख्या वृद्ध एवं लंबी अवधि से जेल में सजा काट रहे कैदीयों की है| इनमें 2 बंदी 90 वर्ष से अधिक आयु के हैं,जबकि 8 कैदी 80 वर्ष से अधिक आयु तथा 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु वर्ग के हैं| इसके अलावा गंभीर रोग से पीड़ित एक बंदी को भी मानवीय आधार पर कारा-मुक्त किया जा रहा है| कारामुक्त होने वाले बंदियों में एक महिला बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में लगभग 20 वर्ष की सजा पूरी की है|
कारा-मुक्त किए जाने वाले बंदियों में रोहतास जेल से मुक्त होने वाले रामबृक्ष कोइरी (उम्र 93 वर्ष), मधेपुरा से योगेश्वर यादव, हरिवंश राम (उम्र 84 वर्ष), रामाशीष यादव (उम्र 82 वर्ष) के अलावा सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता शामिल हैं| इनमें सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता गंभीर रोग से पीड़ित हैं, ये सभी बंदी लंबे समय तक कारावास की सजा भुगत चुके हैं| राज्य बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर इन सभी को कारा-मुक्त किया जा रहा है| राज्य सरकार का यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है|
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