नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा विश्वविद्यालय स्तरीय विद्यार्थियों के लिए आयोजित दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप की शुरुआत मानव अधिकार भवन नई दिल्ली में किया गया| एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी.रामा सुब्रमण्यन ने सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. बिद्युत रंजन षडंगि, महासचिव पियूष गोयल, संयुक्त सचिव समीर कुमार, श्रीमती साइडिंगपुई छकछुआक और निदेशक सुश्री सतोविशा समाजदार की उपस्थिति में कार्यक्रम का उद्घाटन किया| विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के 100 विद्यार्थी, जिन्हें 2,036 आवेदकों में से चुना गया है, इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं|
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए, न्यायमूर्ति रामा सुब्रमण्यन ने कहा कि देश के युवा भाग्यशाली हैं कि वे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों से दूर रह रहे हैं| सशस्त्र संघर्ष और विस्थापन का सामना कर रहे कई लोगों के विपरीत, उन्हें भोजन, शिक्षा और आश्रय जैसे बुनियादी मानव अधिकार उपलब्ध हैं| इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस द्वारा जारी ‘ग्लोबल पीस इंडेक्स 2025’ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया वर्तमान में लगभग 130 सशस्त्र संघर्षों का सामना कर रही है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे अधिक हैं| 98 देश बाहरी संघर्षों का सामना कर रहे हैं और 122 मिलियन (12.2 करोड़) से अधिक लोगों को जबरन विस्थापित किया गया है| वैश्विक आर्थिक क्षति लगभग 20 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है, जो दुनिया भर में गंभीर मानवीय स्थिति को उजागर करती है|
न्यायमूर्ति रामा सुब्रमण्यन ने इंटर्नशिप कार्यक्रम को युवाओं को जोड़ने और मानव अधिकारों के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाने का एक प्रभावी तरीका बताया| वे आयोग के ब्रांड एंबेसडर के रूप में विकसित होते हैं|उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनएचआरसी इंटर्नशिप कार्यक्रम का उद्देश्य साथी इंसानों के प्रति समानुभूति और करुणा की भावना को बढ़ावा देना है| उन्होंने कहा कि यदि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों में इन मूल्यों को एक प्रतिशत भी मजबूत कर सका, तो इसे सफल माना जाएगा|
एनएचआरसी के सदस्य, न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन षड़ंगि ने कहा कि इंटर्नशिप कार्यक्रम को प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों के व्याख्यानों के माध्यम से मानव अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर बहुमूल्य ज्ञान प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है| भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गरिमा के साथ जीने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और प्रशिक्षुओं को इस कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने और समाज के हित में करने के लिए प्रोत्साहित किया|
इससे पहले, महासचिव पीयूष गोयल ने कहा कि ऑनलाइन प्रारूप भौगोलिक और वित्तीय बाधाओं को दूर करके इंटर्नशिप कार्यक्रम को अधिक समावेशी और सुलभ बनाता है, जिससे देश भर के विद्यार्थियों को भाग लेने का अवसर मिलता है| उन्होंने कहा कि अगले दो हफ़्तों में प्रशिक्षु प्रतिष्ठित वक्ताओं के साथ बातचीत करेंगे, जिससे एनएचआरसी के अधिदेश और कार्य प्रणाली की गहरी समझ प्राप्त होगी| उन्होंने कहा कि इस इंटर्नशिप का उद्देश्य उन्हें ऐसे जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना है जो साथी इंसानों की गरिमा को बनाए रखें और अपने आस-पास के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करें| उन्होंने आशआ जताई कि यह इंटर्नशिप मानव अधिकारों के बारे में उनकी समझ को समृद्ध करेगी और उन्हें अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक तथा व्यक्तिगत जीवन में न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी|
संयुक्त सचिव श्रीमती साई डिंगपुई छकछुआक ने दो सप्ताह के इंटर्नशिप कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया|इस कार्यक्रम में मानव अधिकार के महत्वपूर्ण विषयों पर लगभग 30 व्याख्यान होंगे और इसमें 20 प्रतिष्ठित अतिथि वक्ता शामिल होंगे, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि, मानव अधिकार संरक्षक, एनएचआरसी के अधिकारी, मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं| प्रशिक्षुओं को पुलिस स्टेशन, तिहाड़ जेल और आशा किरण आश्रय गृह का वर्चुअल दौरा उनकी कार्यप्रणाली और चुनौतियों को समझने के लिए कराया जाएगा, इसके अलावा वे पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता, सामूहिक अनुसंधान परियोजना प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिता में भाग लेंगे|
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