पटना : ग्रामीण विकास मंत्री सह सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास विभाग एवं नाबार्ड के बीच विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के साक्षा या अभिसरण (कन्वर्जेंस) को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई| राज्य में 725 स्थानों को ग्रामीण हाट बाजार तैयार करने के लिए चिन्हित किया गया है| इस मौके पर मंत्री ने कहा कि ग्रामीण हाट बनाने के लिए चिन्हित किए गए स्थलों की समुचित तरीके से समीक्षा करने के बाद इनमें निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए| इन हाट को विकसित करने के लिए तीन तरह के मॉडल को अंतिम रूप से अनुमति प्रदान की गई है| इसमें एक मॉडल 20 डिसमिल क्षेत्र वाला है, दूसरा 50 डिसमिल और तीसरा 1 एकड़ क्षेत्रफल वाला है| इनके आधार पर ही हाट विकसित किए जाएंगे, इससे इनमें एकरूपता बनी रहेगी| नाबार्ड की वित्तीय सहभागिता से पहले चरण में 20-49 डिसमिल के एक-एक ग्रामीण हाट के निर्माण करने का निर्णय लिया गया है| उन्होंने कहा कि सभी जिलों को इसके आधार पर स्थान की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए एक गूगल शीट जारी की गई है|
मंत्री ने कहा कि 20 डिसमिल से अधिक वाले ग्रामीण हाट का निर्माण करने को लेकर 7 जिलों अररिया, बांका, भागलपुर, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल तथा समस्तीपुर से प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं| शेष जिलों से प्रस्ताव तैयार कर जल्द नाबार्ड को उपलब्ध करा दिया जाएगा| उन्होंने कहा कि ग्रामीण हाट के लिए अधिकतम 40 लाख रुपये की राशि केंद्र सरकार के स्तर से प्रस्तावित है, इस राशि में बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को समर्पित किया गया है| उन्होंने कहा कि इस योजना में पहाड़ी इलाकों के निवासी, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों और बकरी पालन की योजना को क्रियान्वित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं| दूधारू बकरी पालन को प्रोत्साहित करने की कार्य योजना तैयार की गई है| मंत्री श्री कुमार ने विभाग एवं नाबार्ड के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, संसाधनों के समुचित उपयोग तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लाभ को अंतिम पायदान तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया| उन्होंने कहा कि इन हाटों के निर्माण से जीविका दीदियों को अपने उत्पादों को ग्रामीण अंचल से बाहर निकालकर सीधे बाजार तक पहुंचाने या इन्हें बेचने में बेहद सुविधा होगी| इन्हें विकसित करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिलेगा, दीदियों के लिए विशेष सुविधाएं इन हाटों में मुहैया कराई जाएगी|
इस अवसर पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने बिहार में ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नाबार्ड की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नाबार्ड राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर काम करने तथा आवश्यकता के अनुसार हर-संभव तकनीकी, वित्तीय एवं संस्थागत सहयोग प्रदान करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है| उन्होंने विभाग की प्राथमिकताओं के अनुरूप परस्पर सहयोग या साक्षा आधारित योजनाओं को आगे बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका, उद्यमिता, वित्तीय समावेशन एवं आधारभूत संरचना के विकास में सहयोग देने का आश्वासन दिया|
अधिकारियों ने विभिन्न प्रस्तावित एवं संचालित योजनाओं की प्रगति, संभावित नए क्षेत्रों तथा आपसी सहयोग के माध्यम से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई गति देने की संभावनाओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया| इस दौरान बिहार में ग्रामीण विकास, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण आधारभूत संरचना, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने सहित विभिन्न क्षेत्रों में नाबार्ड एवं ग्रामीण विकास विभाग के बीच समन्वय एवं अभिसरण के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई|
इस बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, नाबार्ड बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) गौतम कुमार सिंह तथा ग्रामीण विकास विभाग और नाबार्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे|
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