Home स्वास्थ्यकम उम्र में होने वाली डायबिटीज डिमेंशिया की बड़ी वजह

कम उम्र में होने वाली डायबिटीज डिमेंशिया की बड़ी वजह

by Munna Pathak

स्वास्थ्य : बदलती जीवनशैली ने भारत के सामने दो बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां कड़ी कर दी है, डायबिटीज और डिमेंशिया| एक और देश में मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है| दूसरीओर यादाश्त कमजोर होने से सोचने-समझने की क्षमता की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है| एक हालिया अध्ययन उस इन दोनों बीमारियों कस बीच एक महत्वपूर्ण संबंध की ओर इशारा किया है| शोध के मुताबिक कम उम्र में होने वाली डायबिटीज भारत में डिमेंशिया के बढ़ते मामलों की बड़ी वजहों में से एक हो सकती है|

डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और बातचीत करने की क्षमता धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है| उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है, लेकिन अब कम उम्र में भी इसके मामले चिंताजनक है| अध्ययन में सामने आया कि डायबिटीज के अलावा सुनने की क्षमता में कमी, शारीरिक गतिविधियों की कमी और कुपोषण जैसे कारण भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकते हैं| खास बात यह है कि इनमें से कई जोखिम कारकों को जीवनशैली में बदलाव के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है| इस अध्ययन में भारत में डिमेंशिया के प्रसार और उससे जुड़े जोखिम कारकों को समझने के लिये करीब 25 वर्षों के आंकड़ों की समीक्षा की गई|

शोधकर्ताओं की अगुवाई में टीम ने वर्ष 2000 से 2025 के बीच भारतीय आबादी पर हुये अध्ययनों का विश्लेषण किया| शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिमेंशिया के मामले अधिक देखने को मिले हैं| इसकी एक वजह यह हो सकती है कि वहां डिमेंशिया से जुड़े जोखिम कारकों की समय पर पहचान और इलाज की सुविधा सीमित हो सकती है| रिपोर्ट के अनुसार, कई ऐसे कारण हैं जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है, सही समय पर ध्यान देने, बेहतर जीवन शैली अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने से डिमेंशिया के कई मामलों को टाला जा सकता है या इसकी शुरुआत को देर तक टाला जा सकता है|

अध्ययन में बताया गया कि भारतीयों में अधेड़ उम्र के दौरान डिमेंशिया के खतरे में मेटाबोलिक और वैस्कुलर जोखिम कारकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है| इनमें डायबिटीज, बढ़ा हुआ रक्तचाप, खराब जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता, पोषण की कमी, बदलती आदतों से सुधर सकती है तस्वीर शामिल हैं| विशेषज्ञों के अनुसार, डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिये रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है| जैसे, नियमित शारीरिक गतिविधि करें, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें. सुनने की समस्या को नजरअंदाज न करें, मानसिक रूप से सक्रिय रहने की कोशिश करें| डायबिटीज सिर्फ शरीर की बीमारी नहीं, बल्कि लंबे समय में दिमाग की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है| समय रहते सावधानी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे की काफी हद तक कम किया जा सकता है|

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