झारखंड: सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड स्थित छोटे से आदिवासी गांव कोलोमडेगा के फिल्मकार एनपीके पुरुषोत्तम अब लंदन में फिल्म निर्माण की पढ़ाई करेंगे| उन्हें झारखंड सरकार की एमजीओएस छात्रवृत्ति के तहत विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिला है, वह लंदन के सेंट्रल फिल्म स्कूल में फिल्म मेकिंग में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की पढ़ाई करेंगे|गांव से निकलकर क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले पुरुषोत्तम के लिए यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण पड़ाव है| इससे उन्हें फिल्म निर्माण की तकनीक, रचनात्मकता और सिनेमा की बारीकियों को रूप से सीखने का अवसर मिलेगा|
लोगों के सहयोग को बताया सफलता की वजह:
उपलब्धि पर एनपीके पुरुषोत्तम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, टीडब्ल्यूसी कमिश्नर कुलदीप चौधरी, संबंधित अधिकारियों, झारखंड के कलाकारों और फिल्मकारों तथा अपने सहयोगियों के प्रति आभार जताया है||उन्होंने राज्य के करदाताओं के प्रति भी कृतज्ञता जताई है,पुरुषोत्तम के अनुसार यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि झारखंड के लोगों के विश्वास, सहयोग और सपनों का परिणाम है|छात्रवृत्ति के माध्यम से विदेश में पढ़ाई का अवसर मिलने से उन्हें अपने कौशल को आगे बढ़ाने और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलेगा|
मां का सपना होने जा रहा सच:
एनपीके पुरुषोत्तम ने अपने बचपन की एक भावुक याद भी साझा की| उन्होंने बताया कि उनकी मां अक्सर कहती थीं कि अगर वह मन लगाकर पढ़ाई करेगा, तो उन्हें लंदन भेजेंगी,अब वर्षों बाद मां की कही बात सच होने जा रही है|पुरुषोत्तम ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, बड़ी मां और शिक्षकों को दिया| उनका कहना है कि परिवार और शिक्षकों से मिले सहयोग तथा प्रोत्साहन ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का हौसला दिया|उनकी कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि परिवार का भरोसा और शिक्षा के प्रति लगन किसी व्यक्ति को अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है|
‘बांधा खेत’, ‘दहलीज’ और ‘सेरेंग’ से बनाई पहचान:
एनपीके पुरुषोत्तम नागपुरी सिनेमा से जुड़े फिल्मकार हैं, वह ‘बांधा खेत’,‘दहलीज’ और ‘सेरेंग’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं|क्षेत्रीय सिनेमा के प्रति अपनी रुचि और लगातार प्रयासों के जरिए उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पहचान बनाई है|अब लंदन में फिल्म मेकिंग की पढ़ाई करने का अवसर उनके लिए अपने अनुभव को नई तकनीकों और फिल्म निर्माण के आधुनिक प्रक्रियाओं से जोड़ने का मौका देगा| उनकी यह यात्रा झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कहानियों को सिनेमा के माध्यम से आगे लाने की संभावनाओं की ओर ध्यान खींचती है|के
डिग्री नहीं, सिनेमा को बेहतर समझना है लक्ष्य:
पुरुषोत्तम का कहना है कि लंदन जाने का उद्देश्य केवल एमए की डिग्री हासिल करना नहीं है| वह सिनेमा की अपनी समझ को और व्यापक बनाना चाहते हैं तथा फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं को तलाशना चाहते हैं|सिमडेगा के एक आदिवासी गांव से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म निर्माण की पढ़ाई का अवसर हासिल करना उनके सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि है| उनकी सफलता झारखंड के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कला, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों में आगे बढ़ने का सपना देखते रहते हैं|
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