पटना : संस्कार भारती के तत्वाधान में ‘कला संवाद-4’ का आयोजन किया गया| कार्यक्रम का केंद्रीय विषय “कला में ज्ञान, संस्कार और सृजन की प्रासंगिकता” रहा| कला, साहित्य, शिक्षा एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए कला के बदलता स्वरुप और उसके सामाजिक- सांस्कृतिक दायित्व पर विचार-विमर्श किया| कार्यक्रम में मुख्य वक्ता, कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना के पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय कुमार पांडे ने कला के विविध आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला| उन्होंने कहा कि कला में बदलाव आता है और उसका वर्गीकरण उसे सापेक्षता प्रदान करती है| आज के युग में ए आई प्रभावकारी है, लेकिन कलाकार को संतृप्त होने के लिए उसे अपनी सृजनात्मकता बनाए रखने की आवश्यकता है| कार्यक्रम की मॉडरेटर पटना वीमेंस कॉलेज, पटना की सहायक प्राध्यापिका एवं कथक नृत्यांगना यामिनी शर्मा ने संवाद को सार्थक दिशा प्रदान करते हुए कला और शिक्षा के अंतर्संबंध पर विचार-विमर्श किया| उन्होंने कला को नई पीढ़ी के व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया|
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्ज्वलन और संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। उसके उपरांत विष्णु वंदना कथक नृत्य शैली में समीक्षा द्विवेदी, कौशिकी कृति और परी सिंह ने किया| विशेष आकर्षण ‘गुरु बिन ज्ञान ना उपजे’ शीर्षक से प्रस्तुत नृत्य नाटिका रही| संगीत शिक्षायतन, पटना के कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान की महत्ता और गुरु के प्रति श्रद्धा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया| नृत्य, संगीत और अभिनय के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को अपनी और आकर्षित किया| कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि “गुरु केवल ज्ञान नहीं देता, बल्कि ज्ञान को संस्कार में बदलने की दृष्टि भी प्रदान करता है|” कलाकारों की प्रस्तुति को उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा| रिचा चौबे ने ध्येय गीत गा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई| कार्यक्रम का संचालन नेहाल कुमार सिंह निर्मल ने किया साथ ही कार्यक्रम का आयोजन रोक एंड रॉल आर्ट एंड क्राफ्ट स्कूल कंकड़बाग में आयोजित किया गया| कार्यक्रम के उपरांत नृत्य कलाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया| इस अवसर पर संस्कार भारती, पटना महानगर इकाई के अध्यक्ष उदय शंकर पांडे, डा शैलेन्द्र, जीतेन्द्र चौरसिया, भारतेन्दु कुमार चौहान, ऋषि कुमार,सत्यप्रकाश सहित भारी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे|
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