Home बिहारपर्यावरण संरक्षण के लिए जन भागीदारी सबसे जरुरी : मंत्री

पर्यावरण संरक्षण के लिए जन भागीदारी सबसे जरुरी : मंत्री

by Munna Pathak

पटना : हरित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पौधारोपण के साथ-साथ व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाना संही की आवश्यकता है| वर्ष 2028 तक बिहार के हरित आवरण को 17 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य की प्राप्ति में आमजन की सक्रीय भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाएगी|

चतुर्थ कृषि रोड मैप में भी इसे प्रमुखता से शामिल किया गया है| इस बात की चर्चा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने पटना स्थित अरण्य भवन में ‘जल-जीवन-हरियाली दिवस’ के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कही| इस दौरान ‘आज पौधशाला, कल वन—भविष्य का हरित निवेश’ विषय पर जल-जीवन-हरियाली अभियान से जुड़े सभी 15 क्रियान्वयन विभागों के साथ विस्तृत परिचर्चा भी आयोजित की गई|
हरियाली मिशन से बदली बिहार की तस्वीर
मंत्री ने कहा कि बिहार से झारखंड विभाजन के बाद वर्ष 2001 में राज्य का वन आवरण मात्र 6.07 प्रतिशत था| हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2012 में हरियाली मिशन की शुरुआत की गई| इसके तहत वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2025-26 तक राज्यभर में 46.07 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणाम स्वरूप बिहार का हरित आवरण बढ़कर 15.05 प्रतिशत हो गया है| उन्होंने बताया कि तृतीय कृषि रोड मैप के तहत 15 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है, जबकि चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) के तहत इसे बढ़ाकर 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है|
जनजागरूकता से मजबूत होगा पर्यावरण संरक्षण अभियान
मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक वर्ष जुलाई में वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है| वहीं 9 अगस्त को बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर राज्य के सभी विद्यालयों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं| इस दौरान छात्र-छात्राओं को 11 सूत्री संकल्प की शपथ दिलाई जाती है, ताकि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति आजीवन सजग और जिम्मेदार नागरिक बन सकें|
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिला व्यापक जनसमर्थन
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को बिहार में उल्लेखनीय जन सहयोग मिला है| अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.42 करोड़ तथा 2025-26 में 1.85 करोड़ पौधारोपण का विवरण ‘मेरी लाइफ’ (मिशन लाइफ) पोर्टल पर दर्ज किया गया है| पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है|
राज्य सरकार जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 15 क्रियान्वयन विभागों के समन्वय से 11 प्रमुख अवयवों पर कार्य कर रही है| ग्रामीण विकास विभाग इसके नोडल विभाग के रूप में कार्य कर रहा है| अभियान के तहत जल संरक्षण, तालाबों एवं कुओं का जीर्णोद्धार, चेक डैम निर्माण, वर्षा जल संचयन, पौधशाला सृजन, सघन वृक्षारोपण, जैविक खेती, सौर ऊर्जा के उपयोग तथा जन जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं| 26 हजार से अधिक चेकडैम और 23.67 करोड़ पौधों का रोपण पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की तरफ से वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक 26,590 चेकडैम एवं अन्य जल संरचनाओं का निर्माण कराया गया है| इसी अवधि में 23.67 करोड़ पौधों का रोपण भी किया गया| वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 50.69 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं|सरकार का मानना है कि इस अभियान से भूजल स्तर में सुधार, हरित क्षेत्र का विस्तार, वैकल्पिक जल स्रोतों की उपलब्धता, सौर ऊर्जा को बढ़ावा तथा बाढ़ एवं सूखे जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता मिलेगी| इस अवसर पर
विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह,अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यप्राणी प्रति पालक अभय कुमार, जल-जीवन-हरियाली मिशन के नोडल पदाधिकारी अमित कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के जल-जीवन-हरियाली मिशन के मिशन निदेशक सुमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे|

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