Home बिहारलोक सेवा केन्द्रों की स्थापना से ब्लॉक का चक्कर काटने से ग्रामीणों को मिली मुक्ति

लोक सेवा केन्द्रों की स्थापना से ब्लॉक का चक्कर काटने से ग्रामीणों को मिली मुक्ति

by Munna Pathak

पटना : बिहार में सरकारी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और पारदर्शिता की दिशा में चलाए जा रहे अभियानों का असर अब धारातल पर दिखने लगा है|सामान्य प्रशासन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में ई- सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने की पहल के बेहद सकारात्मक परिणाम आए हैं| पंचायत स्टार पर स्थापित लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से अब तक कुल 33,77,620 (33.77 लाख) आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 33,48,776 (33.48 लाख) आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है| इस व्यवस्था से अब आम नागरिकों को छोटी-मोटी सरकारी सेवाओं के लिए अनुमंडल या जिला मुख्यालय जाने की बाध्यता खत्म हो गई है और गांव स्तर पर ही तेजी से काम निपट रहे हैं|
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जुलाई 2025 से पंचायत सरकार भवनों और पंचायत भवनों में स्थापित लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से 64 से अधिक ई-सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं| इससे पूर्व बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 के अंतर्गत 14 विभागों की 153 प्रकार की सेवाएं जैसे जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र, नया राशन कार्ड, मजदूर दुर्घटना अनुदान, चालक अनुज्ञप्ति (ड्राइविंग लाइसेंस) निर्गमन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन आदि नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं| इस पूरी व्यवस्था के तहत राज्य में अब तक 53.80 करोड़ से अधिक आवेदनों का सफल निष्पादन किया जा चुका है|
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार के डिसरेगुलेशन एंड कंप्लायंस रिडक्शन (बिहार)-फेज-2 (पीए-23) के आलोक में आरटीपीएस अपील पोर्टल पर 23 जून 2026 से स्वत: अपील (ऑटो अपील) की व्यवस्था भी शुरू की गई है| इसके अलावा, बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत 45 विभागों की 514 सेवाओं/ योजनाओं में समयबद्ध एवं पारदर्शी शिकायत निवारण सुनिश्चित किया जा रहा है| जनवरी 2016 से अब तक 19.38 लाख से अधिक शिकायतों एवं परिवादों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया है|
इसी क्रम में सरकारी सेवकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए 3 जून 2019 से प्रभावी ऑनलाइन प्रणाली संचालित है, जिसके तहत अब तक 16,106 शिकायतों का निष्पादन हो चुका है| प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) का पूर्ण डिजिटलीकरण किया गया है, जिसके अंतर्गत 2.72 लाख सेवा अभिलेखों का डिजिटलीकरण, 1.23 करोड़ से अधिक पृष्ठों की स्कैनिंग और 48 विभागों के 8 लाख कर्मियों के सेवा एवं वेतन प्रबंधन का कार्य पूर्ण किया जा रहा है|
विभाग की पारदर्शिता नीति के तहत राज्य सरकार के सभी समूह ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ के अधिकारियों और कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति एवं दायित्वों का विवरण हर साल वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाता है| आम जनता की सहायता के लिए 2010 से जिज्ञासा केंद्रीय हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर-14403) संचालित है, जिससे अब तक 8,19,622 से अधिक नागरिकों को जानकारी दी गई है| वहीं, 2016 से शुरू समाधान कॉल सेंटर (टॉल फ्री-1800-345-6284) के माध्यम से 12,93,847 से अधिक नागरिकों ने शिकायतें दर्ज कराईं और जानकारी प्राप्त की|


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