नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स यानी AHTUs) को पुलिस स्टेशन का दर्जा देने के लिए कानून के अनुसार जल्द से जल्द आवश्यक अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है|अदालत ने कहा कि मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा के लिए तैयार की गई पीड़ित संरक्षण योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह कदम जरूरी है| सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभागों को इस निर्देश पर जल्द अमल करने को कहा है| इसके साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कराना सुनिश्चित करे|
पैराग्राफ 362(b)(iii) का दिया गया हवाला:
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट ने अदालत का ध्यान मुख्य फैसले के पैराग्राफ 362(b)(iii) की ओर दिलाया| इसमें मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को पुलिस स्टेशन का दर्जा देने का निर्देश शामिल है| इस दलील को स्वीकार करते हुए पीठ ने संबंधित सरकारों को निर्देश जारी किया|
चार अतिरिक्त निर्देशों पर भी नहीं हुआ पूरी तरह अमल:
अदालत ने यह भी पाया कि मुख्य फैसले के पैराग्राफ 456 में दिए गए चार अतिरिक्त निर्देशों का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह पालन नहीं हुआ है| इनमें अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 की धारा 15(6A) और 17A के तहत मान्यता प्राप्त कल्याणकारी संस्थानों को अधिसूचित करना, पात्र समाज कल्याण कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करना और पुलिस और सरकारी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना शामिल है|
अगली सुनवाई को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश:
पीठ ने इन उपायों को योजना के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहद जरूरी बताया है| अदालत ने केंद्र सरकार से अगली सुनवाई तक अनुपालन सुनिश्चित करने, संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने और नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.|सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर, 2026 को होगी|
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