Home पश्चिम बंगालदार्जिलिंग में चाय बागान मजदूर आंदोलन के सौ दिन

दार्जिलिंग में चाय बागान मजदूर आंदोलन के सौ दिन

by Munna Pathak

दार्जिलिंग/पश्चिम बंगाल: दार्जिलिंग पहाड़ियों के गाड़ीधुरा और पंखाबाड़ी के बीच स्थित लांगव्यू चाय बागान कभी दार्जिलिंग के सबसे बड़े बागानों में से एक हुआ करता था, इसकी उत्पादकता भी काफी अधिक थी| 1879 में स्थापित इस बागान का कुल क्षेत्रफल 1,020 हेक्टेयर है| वर्तमान में इसका आधा हिस्सा जंगल में तब्दील हो चुका है, चाय की खेती के तहत अब केवल 502 हेक्टेयर भूमि ही बची हुई है| कर्मचारियों की संख्या कभी 1,244 थी, लेकिन आज वहां केवल 300 से कुछ अधिक मजदूर काम कर रहे हैं| मजदूरी, वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी की भारी गड़बड़ियों से तंग आकर मजदूरों ने काम छोड़ दिया| मजदूर और उनके परिवार के लोग दूर-दराज के इलाकों में या आस-पास के 6-7 बागानों में काम तलाशने पर मजबूर हो गए| दार्जिलिंग-कालिम्पोंग पहाड़ियों के बागान मजदूरों के संघ (यूनियन) के रूप में 1 मई 2023 (मई दिवस) को ‘हिल प्लांटेशंस एम्प्लाइज यूनियन’ (HPEU) ने अपने पंजीकरण की घोषणा करते हुए काम शुरू किया| मार्गरेट्स होप, धोत्रे, पेशोक, बड़ाफागु, बालासन जैसे विभिन्न बागानों में कई कार्यक्रम चल रहे थे, वहीं रिंगटोंग बागान में उसी मानसून में एक जोरदार आंदोलन हुआ| द्विपक्षीय समझौते के जरिए वह मामला अभी थोड़ा शांत ही हुआ था कि पंखाबाड़ी के पास स्थित लांगव्यू चाय बागान का आंदोलन सिर उठाने लगा| जुलाई 2024 के अंत में यूनियन की एक शाखा गठित की गई|
लांगव्यू आंदोलन: 2024
मजदूरों के बकाया 16.9 करोड़ रु. के भुगतान की मांग को लेकर कई डेपुटेशन और द्विपक्षीय बैठकों के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो 17 अगस्त से धरना शुरू हुआ और चाय की पत्तियां तोड़ने का काम बंद कर दिया गया| 6 सितंबर को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें बकाया राशि के भुगतान की एक निश्चित समय-सीमा तय की गई| यह मजदूरों की पहली महत्वपूर्ण जीत थी, हालांकि, एक-दो महीने पैसे देने के बाद आखिरकार मालिक पक्ष ने उस समझौते को तोड़ दिया|
जब पूरे चाय क्षेत्र में मजदूरों के बोनस आंदोलन के दौरान लांगव्यू मालिक ने केवल 10 प्रतिशत बोनस देने की बात कही, तो मजदूरों ने अनशन शुरू कर दिया| दूसरी ओर, पूरे पहाड़ में बोनस आंदोलन का सुर अभूतपूर्व रूप ले चुका था| पुलिस के दमन, मुकदमों, सत्ताधारी पार्टी और प्रशासन की धमकियों की परवाह किए बिना विभिन्न बागानों के निडर मजदूर भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए| अंततः सरकार को सभी बागानों में 16 प्रतिशत बोनस की एडवाइजरी जारी करना पड़ी, लेकिन लांगव्यू के मालिक ने इसे देने से इनकार कर दिया| मजदूरों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए, उन्हें शारीरिक उत्पीड़न और मौखिक अपमान भी सहना पड़ा| आखिरकार, लगातार 32 दिनों के अनशन के बाद मालिक पक्ष को झुकना पड़ा और 9 नवंबर को सभी को 16 प्रतिशत बोनस मिला|
लांगव्यू बागान का जंगलराज
हाजिरी और वेतन में ढिलाई, पीएफ तथा ग्रेच्युटी का गबन और एलटीए, डीएलआई, पेंशन एवं एरियर को लेकर टालमटोल तो था ही| इसके अलावा, कई मजदूरों के सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर जाने के बाद भी कंपनी ने उन्हें रिटायरमेंट नहीं दिया, ताकि उन्हें ग्रेच्युटी और पीएफ न देना पड़े| नतीजतन, उन बुजुर्ग मजदूरों को मजबूरी में काम करते रहना पड़ रहा है| इसके अतिरिक्त कागजातों में अनगिनत खामियां, UAN नंबर न होना, और मजदूरों को विभिन्न कानूनी सुविधाओं से वंचित रखने के आरोप भी हैं| मजदूरों के अनुसार, लंबे समय से चला आ रहा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही ही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है|
2026 में लांगव्यू के मजदूरों के संघर्ष का मुख्य केंद्र बिंदु मालिक पक्ष द्वारा प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी से जुड़ी धोखाधड़ी बन गया| मजदूरों ने फस्ट फ्लश की पत्तियां तोड़ना शुरू किया, तो मालिक पक्ष ने हाजिरी और वेतन देने में ढिलाई बरतनी शुरू कर दी| मजदूरों की 250 रु. की दैनिक मजदूरी में से पीएफ के नाम पर रोज काटे जाने वाले 30 रु. भी मालिक ने जमा नहीं किए थे, मालिक के अपने हिस्से की बात तो दूर की है| मजदूरों के आंदोलन के दबाव में 10 मार्च को कोलकाता में श्रम मंत्री के कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक हुई, समझौता हुआ कि मालिक 15 अप्रैल तक मजदूरों के अंशदान का 3.5 करोड़ रु. प्रोविडेंट फंड खाते में जमा कराएगा| लेकिन समझौता लागू न होने पर मजदूरों को 20 अप्रैल से क्रमिक अनशन (रिले हंगर स्ट्राइक) शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा| चुनाव के कारण 21 अप्रैल को पुलिस ने आकर अनशन समाप्त करने को कहा, 25 अप्रैल से फिर से क्रमिक अनशन शुरू हुआ|
दूसरी ओर, बागान में एक विशाल ‘चेतावनी जुलूस’ का आयोजन किया गया, ‘चलो लांगव्यू’ पदयात्रा दो दिनों तक पैदल चलकर अनशन के 95वें दिन जब अनशन मंच की ओर बढ़ी, तो उनके स्वागत के लिए सैकड़ों मजदूर कतारबद्ध खड़े थे|,कलकत्ता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में पीएफ मामले के संदर्भ में लांगव्यू चाय बागान के मालिक पक्ष ने बताया कि उन्होंने पीएफ की बाकी रकम में से 2 करोड़ रु. परसों ही जमा कर दिए हैं, लेकिन वहां भी उन्हें कोई छूट नहीं मिली| हाईकोर्ट ने मजदूरों की मजदूरी से काटे गए बाकी 1.32 करोड़ रु. दो हफ्ते के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है| तब तक कोर्ट ने पीएफ आफिस से कोई कड़ा कदम न उठाने का अनुरोध किया है| कुल मिलाकर, अनशन आंदोलन के 99वें दिन इस गौरवशाली मजदूर आंदोलन ने एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है|

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

You may also like

Leave a Comment