नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजमार्गों पर सडक हादसे में घायल लोगों को जल्द मदद देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एम्बुलेंस सेवाओं के नियम को सख्त कर दिया है| अब टोल बूथ के 10 किलोमीटर के दायरे में हादसा होने पर एम्बुलेंस को 10 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचना होगा| देरी होने पर सम्बंधित ठेकेदार या ऑपरेटर पर 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा| नए नियमों के मुताबिक, इमरजेंसी टिकट स्वीकार होने के बाद एम्बुलेंस को 2 मिनट के भीतर घटनास्थल के लिए रवाना होना होगा| इससे ज्यादा समय लगने पर हर मिनट या उसके हिस्से के लिए 5 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगेगा| टोल बूथ से 10 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हादसा होने की स्थिति में पहुंचने का अनुमेय समय दूरी के हिसाब से बढ़ाया जाएगा| वहीं, मरीज को इमरजेंसी टिकट स्वीकार होने के बाद एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाना होगा| इसमें देरी होने पर प्रति घटना 10 हजार रुपये की पेनल्टी लगेगी|
GPS से होगी निगरानी, नियम तोड़े तो जुर्माना
हाईवे पर तैनात सभी एम्बुलेंस में AIS-140 मानकों वाला GPS डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा| एम्बुलेंस की गतिविधियों पर GPS और IMS Care डैशबोर्ड के जरिए नजर रखी जाएगी| GPS नहीं होने या डैशबोर्ड पर एम्बुलेंस दिखाई नहीं देने पर 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा| किसी इमरजेंसी टिकट को ऑन-रोड यूनिट द्वारा रिजेक्ट करने पर 10 हजार रुपये की पेनल्टी होगी| निरीक्षण के दौरान एम्बुलेंस में जरूरी दवाएं, उपकरण या पर्याप्त पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं मिलने पर भी 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा|
हर दिन 5 किमी ड्राई रन करना होगा
एम्बुलेंस को हर 24 घंटे में कम से कम 5 किलोमीटर का ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर वाहन तुरंत सेवा के लिए तैयार रहे| अगर उस दिन एम्बुलेंस किसी वास्तविक हादसे में सेवा दे रही है और उसकी कुल आवा-जाही 5 किलोमीटर से ज्यादा हो जाती है तो अलग से ड्राई रन की जरूरत नहीं होगी\ एनएचएआई के मुताबिक, एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी और CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में आपत्ति जताई गई थी|इसके बाद एम्बुलेंस सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ये नए नियम लागू किये गए हैं|
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