दरभंगा : जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की महिला जन प्रतिनिधियों और वार्ड सदस्यों ने अन्य बाढ़ प्रभावित जलों के लिए एक नया आयाम पेश किया है| यहां के 7 (सात) बाढ़ प्रभावित प्रखंडों – कुशेश्वर स्थान, कुशेश्वर स्थान पूर्वी, सिंहवाड़ा, कीरतपुर, हनुमान नगर, गौरा बौराम और बिरौल की 70 पंचायतों में महिला मुखियाओं की आपदा पूर्व तैयारियों से स्थानीय आपदा प्रबंधन का एक सफल “गुड प्रैक्टिस मॉडल” विकसित हुआ है| पंचायती राज विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, जिला प्रशासन और तकनीकी सहयोगी संस्था सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सीथ्री) ने ‘प्रोजेक्ट मेघा’ के तहत इन महिला जन प्रतिनिधियों को क्षमता निर्माण कार्यक्रम से प्रशिक्षित किया है| परिणामस्वरूप, वे गांवों में सुरक्षित ऊंचे स्थान चिन्हित करते हुए वहां पक्के राहत शिविरों, जल निकासी के साथ ही जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रही हैं|
प्रशिक्षण के बाद आया बदलाव
कुशेश्वर स्थान पूर्वी प्रखंड के उसरी पंचायत की वार्ड सदस्य रीना देवी ने सितंबर 2024 की बाढ़ में डूबी अपनी पंचायत की सूचना अविलंब प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी और निचले इलाकों से लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ को बुलाया, इनकी कोशिश से समुदाय सुरक्षित रह पाया| इसी प्रखंड के इटहार पंचायत की वार्ड सदस्य मीरा कुमारी ने ‘मेघा प्रशिक्षण’ के बाद आत्मविश्वास महसूस किया| उन्होंने बाढ़ की स्थिति में प्रशासन से त्वरित संपर्क कर नाव, राशन और एनडीआरएफ की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई, जिससे ग्रामीण सुरक्षित रहे\ मीरा ने कहा कि पहले वे दूसरों पर निर्भर रहती थीं, लेकिन अब अपनी सक्षमता का अहसास हो गया है| कीरतपुर प्रखंड के रसियारी पौनी पंचायत की महादलित समुदाय की सुदामिया देवी ने बाढ़ आने पर साफ और सुरक्षित स्थान पर सामुदायिक रसोई शुरू करवाई तथा बाढ़ उतरने के बाद प्रभावित परिवारों को जरूरी मदद पहुंचाई| बाढ़ में ग्रामीणों, पशुओं और फसलों को हुए नुकसान की मुआवजा क्षतिपूर्ति में भी ये जन प्रतिनिधि अहम भूमिका निभा रही हैं|
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