पटना : बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में देश के सर्व्श्रेष्ठ पुस्तकालयों की तर्ज पर बिहार विधानमंडल पुस्तकालय के विकास, संवर्धन तथा ताजी के प्रमुख पुस्तकालयों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा को लेकर एक बैठक आयोजित की गई| बैठक के दौरान बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का जीवंत भंडार हैं| उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युग में इनका स्वरूप अत्यंत समृद्ध और तकनीकी रूप से उन्नत होना चाहिए| अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि पुस्तकालय भवनों के संरक्षण और साफ-सफाई के साथ-साथ उनमें पाठकों के लिए पेयजल, शौचालय, वातानुकुलित व्यवस्था और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थी और पाठक अधिक संख्या में आकर्षित हों| उन्होंने पुरानी एवं दुर्लभ पुस्तकों के डिजिटाइजेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा|इसके अतिरिक्त, उन्होंने पुस्तकालयों की प्रबंध समिति में स्थानीय विधायकों तथा शिक्षाविदों को सदस्य बनाने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया, ताकि इन संस्थानों को जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन मिल सके और उनकी कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित एवं जवाबदेह बने|
अध्यक्ष ने पुस्तकालयों की जर्जर स्थिति और अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त करते हुए भवनों के संरक्षण और साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया| साथ ही, प्रमंडलीय एवं जिला पुस्तकालयों की समितियों की बैठकें नियमित रूप से हर तीन माह पर आयोजित करने तथा उसकी अनुपालन रिपोर्ट विभाग को भेजने का सुझाव दिया| बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अन्य राज्यों के पुस्तकालयों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने हेतु उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव की अध्यक्षता में सभा सचिवालय एवं शिक्षा विभाग की एक संयुक्त टीम दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पांच दिवसीय स्थल अध्ययन दौरे पर शीघ्र भेजी जाएगी|
इस बैठक में बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, शाहजहां, संयुक्त सचिव, शिक्षा विभाग,सचिन्द्र कुमार, निदेशक, पुस्तकालय एवं सूचना केंद्र निदेशालय, सिन्हा लाइब्रेरी, राजकीय उर्दू लाइब्रेरी एवं राजकीय पुस्तकालय, पूर्णिया, प्रमंडलीय पुस्तकालय, गया जी, सारण, मुजफ्फरपुर के प्रतिनिधियों सहित अन्य विभागीय पदाधिकारी एवं सचिवालय के वरीय पदाधिकारी गण उपस्थित थे|
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