Home आधी-आबादीसिलाई-कढ़ाई से बदली ग्रामीण महिलाओं की किस्मत

सिलाई-कढ़ाई से बदली ग्रामीण महिलाओं की किस्मत

by Munna Pathak

पटना : बिहार के ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक रूप से सुई-धागे तक सीमित रहने वाली महिलाओं का हुनर अब उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है| ग्रामीण विकास विभाग का अंतर्गत कार्यरत बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के इसी पारंपरिक कौशल को संगठित उद्योग का रूप दे दिया है| जीविका के स्तर से संचालित सिलाई आधारित आजीविका मॉडल ने न केवल ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्थायी स्वरोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि राज्य में महिला-केंद्रित सामुदायिक उद्यमिता की एक नई मिसाल पेश की है|

योजना के तहत वर्तमान में राज्य में 50 हजार से अधिक महिलाओं को सिलाई कार्य के माध्यम से प्रत्यक्ष रोजगार मिल चुका है| समूहों से जुड़ी महिलाएं सिलाई कार्य से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं| जीविका के अधिकारियों के अनुसार, इस सिलाई पहल को संस्थागत और व्यापक स्वरूप देने के लिए वर्ष 2023 में जानकी जीविका महिला सिलाई प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया था|वर्तमान में विभिन्न सरकारी विभागों के अभिसरण से जीविका दीदियों को बड़े पैमाने पर वर्क ऑर्डर (आपूर्ति आदेश) उपलब्ध कराए जा रहे हैं| ये दीदियां स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के लिए आकर्षक यूनिफॉर्म के साथ-साथ विभिन्न अस्पतालों में अंतःवासी (भर्ती) रोगियों के लिए कपड़ों की सिलाई भी कर रही हैं| इन दीदियों ने विभिन्न विभागों के साथ मिलकर अब तक 149.7 करोड़ रुपये का शुद्ध व्यवसाय किया है और उनके द्वारा रिकॉर्ड 68,77,557 परिधान (ड्रेस) तैयार कर विभिन्न संस्थानों को उपलब्ध कराया जा चुका है|

15 जिलों में नोडल सिलाई सह प्रशिक्षण केंद्र

आंकड़ों पर गौर करें तो जीविका दीदियों के लिए राज्य के 15 जिलों में नोडल केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 1,365 आधुनिक सिलाई मशीनों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है| शेष 23 जिलों में कार्यक्रम का विस्तार करते हुए प्रत्येक प्रखंड के कम से कम दो संकुल स्तरीय संघों (सीएलएफ) में सिलाई केंद्र एवं वस्त्र-कटाई (फैब्रिक कटिंग) केंद्र स्थापित किए गए हैं| 45,000 से अधिक ब्लैक सिलाई मशीनों के साथ जीविका दीदियां क्लस्टर, उत्पादक समूह एवं ग्राम संगठन स्तर पर वस्त्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है|

Have any thoughts?

Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!

You may also like

Leave a Comment