Home बिहारजीविका से सशक्त होंगे बिहार के वृद्धजन और दिव्यांगजन: श्रवण कुमार

जीविका से सशक्त होंगे बिहार के वृद्धजन और दिव्यांगजन: श्रवण कुमार

by Munna Pathak

पटना: ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तथा उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ग्रामीण विकाश विभाग के अंतर्गत बिहार ग्रामीण आजीविका संवर्धन सोसाइइटी (जीविका) ने महत्वपूर्ण पहल की है|इसके तहत राज्य में दिव्यांगजनों और वृद्धजनों के लिए अलग-अलग विशेष स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है| इन समूहों के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों को आर्थिक सहयोग, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ,आवश्यक प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है|जीविका की इस पहल का उद्देश्य इन वर्गों को केवल सरकारी सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना तथा समाज की मुख्यधारा में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है|

2.42 लाख से अधिक दिव्यांगजन जीविका से जुड़े:
जीविका के माध्यम से संचालित स्वयं सहायता समूहों से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पहले से जुड़े हुए हैं| उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार,14 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से लगभग 2 लाख 42 हजार दिव्यांगजन जुड़े हैं| इनके सशक्तीकरण और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए अब विशेष समूहों के गठन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके|इस पहल के तहत दिव्यांगजनों और वृद्धजनों के लिए पुरुष, महिला और मिश्रित समूहों का गठन किया जा रहा है| इन समूहों को नियमानुसार 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड तथा 1.50 लाख रुपये का इनिशियल कैपिटलाइजेशन फंड उपलब्ध कराने की व्यवस्था है| इससे समूह के सदस्यों को आर्थिक गतिविधियां शुरू करने, छोटे व्यवसाय विकसित करने और आजीविका के साधन तैयार करने में मदद मिलेगी|

अब तक हजारों विशेष समूहों का गठन:
इस पहल के तहत राज्य में अब तक दिव्यांगजनों के लिए 8,299 विशेष समूहों का गठन किया जा चुका है| वहीं, तीन जिलों में वृद्धजनों के लिए 686 विशेष समूह बनाए गए हैं, इन समूहों से 50,486 दिव्यांगजन और 8,559 वृद्धजन जुड़ चुके हैं| विशेष समूहों के माध्यम से लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण देने और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है|

पेंशन से लेकर सहायक उपकरणों तक सहायता:
जीविका और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से इन वर्गों को आधार कार्ड, पैन कार्ड, पेंशन तथा अन्य पात्रता-आधारित सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं| इसके साथ ही पटना स्थित सीसीआरसी के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों को व्हीलचेयर, छड़ी, चश्मे और अन्य आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है|
कुटीर उद्योग और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर:
सरकार की इस पहल में आजीविका के स्थायी साधन विकसित करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है| विशेष समूहों के सदस्यों को उनकी क्षमता, रुचि और जरूरतों के अनुरूप कुटीर उद्योगों तथा छोटे व्यवसायों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है| दिव्यांगजनों के लिए लिफाफे और पेपर बैग बनाने जैसी उत्पादक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है|
इसके माध्यम से लाभार्थियों को कौशल विकास, सामूहिक उद्यम और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है| इससे वे अपनी क्षमता के अनुसार आय अर्जित कर सकेंगे और आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे| जीविका के विशेष समूहों के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और सम्मानजनक जीवन के अवसरों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है|

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