Home आधी-आबादीदीदी अधिकार केंद्र बनीं ग्रामीण महिलाओं के हक, सम्मान और न्याय की मजबूत आवाज

दीदी अधिकार केंद्र बनीं ग्रामीण महिलाओं के हक, सम्मान और न्याय की मजबूत आवाज

by Munna Pathak

पटना: बिहार में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में जीविका दीदी अधिकार केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है|इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को न केवल अपने अधिअक्रों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, बल्कि घरेलू हिंसा, दहेज़ उत्पीड़न, सामाजिक उत्पीड़न और पारिवरिक विवाद जैसी समस्याओं में आवश्यक परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराई जा रही है|साथ ही, महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सहयोग दिया जा रहा है|बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके समुदाय के बीच ही ऐसा सुलभ मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं रख सकें और उनके समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें| इसके माध्यम से महिलाओं की कानूनी सहायता, सामाजिक सुरक्षा और न्याय तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है|
महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समस्याओं के समाधान में सहायता देने के उद्देश्य से प्रारंभ में पटना और मुजफ्फरपुर के दो प्रखंडों में दीदी अधिकार केंद्रों की स्थापना की गई थी| इन केंद्रों की उपयोगिता को देखते हुए अब राज्य के सभी 38 जिलों में लगभग 260 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं| इन केंद्रों पर महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और अन्य सामाजिक समस्याओं से जुड़े मामलों में परामर्श, मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाती है| जीविका के अधिकारियों के अनुसार, दीदी अधिकार केंद्रों के माध्यम से अब तक 51 हजार से अधिक महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा चुकी है| यह पहल ग्रामीण महिलाओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक बन रही है|महिलाओं को जरूरत के अनुसार बेहतर कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) में भी सहायता केंद्र स्थापित किया गया है| यहां महिलाओं की शिकायतों, हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कानूनी सलाह एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है|
दीदी अधिकार केंद्रों के दायरे को और व्यापक बनाने की तैयारी है| विभागीय योजना के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य है| इसके तहत अधिक से अधिक प्रखंडों की ग्रामीण महिलाओं तक सहायता सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा|इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को परामर्श देने, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने तथा राशन कार्ड, पेंशन, आधार, वीबी-जी राम जी, आवास और दिव्यांगजन कल्याण से संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहयोग दिया जाएगा| इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी के अभाव, दस्तावेजी कठिनाइयों या अन्य बाधाओं के कारण कोई भी पात्र महिला सरकारी सुविधाओं से वंचित न रहे| दीदी अधिकार केंद्रों की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने, कठिन परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मन जा रहा है|।

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