पटना: बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्थानीय पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभाकक्ष में उच्च स्तरीय समिति की तृतीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई| इस बैठक में राज्य के समग्र बैंकिंग प्रदर्शन, वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति, साख जमा अनुपात की वर्तमान स्थिति और विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की गहन समीक्षा की गई|बैठक में पहली बार विकास आयुक्त श्री सिंह ने राज्य में कार्यरत बैंकों के कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 100 अंकों का एक वैज्ञानिक मापन सूचकांक लागू किया| इस नए पारदर्शी सिस्टम में विभिन्न मापदंडों के लिए अंक निर्धारित कर रैंकिंग और स्कोरिंग तय की गई है| साथ ही इस बार राज्य सरकार ने समीक्षा के दायरे को व्यापक बनाते हुए चार नई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को ऋण निगरानी तंत्र में जोड़ा है, इससे वित्तीय प्रवाह की अधिक सटीक ट्रैकिंग संभव हो सकेगी| वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार बढ़ाकर 4 लाख 95 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है| यह राशि इस वित्तीय वर्ष के लिए राज्य के करीब 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के योजना आकर से लगभग चार गुणा अधिक है|
यह राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को एक मजबूती प्रदान करेगी| इस निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध सितंबर तिमाही में राज्य ने 1 लाख 89 हजार 343 करोड़ रुपये (38.25 फीसदी) की मजबूत उपलब्धि हासिल कर ली है|विकास आयुक्त ने रेखांकित किया कि यह प्रगति विगत वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी छमाही की तुलना में 46 हजार 228 करोड़ रुपये अधिक है, जो बिहार में निवेश और आर्थिक गतिविधियों में आई भारी तेजी को प्रमाणित करती है| क्षेत्रवार प्रगति के अंतर्गत एमएसएमई क्षेत्र ने सर्वाधिक उत्साह जनक प्रदर्शन करते हुए 1 लाख 59 हजार 632 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 84 हजार 91 करोड़ (52.68 फीसदी) रुपये की बड़ी उपलब्धि हासिल की है|
कृषि क्षेत्र में 1,57,015 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 43,967.17 करोड़ (28.00 फीसदी) रुपये का ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया गया है और कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में 3,55,532 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,30,619.00 करोड़ (36.74 फीसदी) रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है| वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में बिहार ने पहली बार 60.21 फीसदी का ऐतिहासिक साख जमा अनुपात हासिल किया था| यह सकारात्मक गति इस वित्तीय वर्ष में भी बरकरार है| 30 सितंबर 2026 तक राज्य का समग्र सीडी रेशियो 60.17 फीसदी पर बना हुआ है|वर्तमान में राज्य में कुल जमा राशि बढ़कर 6,49,225 करोड़ रुपये और कुल बकाया साख 3,90,655 करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गई है| पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में 33,797 करोड़ रुपये और साख (ऋण प्रवाह) में 20,092 करोड़ रुपये की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई है|
विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की समीक्षा करते हुए विकास आयुक्त ने किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक तीव्र बनाने का निर्देश दिया| आंकड़ों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कुल 7,37,906 खातों के माध्यम से किसानों को 8,344.70 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 7,12,383 खातों का नवीनीकरण भी शामिल है|साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में 605.01 करोड़ रुपये और मत्स्य पालन में 11.12 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है| पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में राज्य में कुल 13,911 आवेदन स्वीकृत कर 28,451.21 लाख रुपये की राशि को गति दी गई है| वहीं, रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत कुल 2,17,731 आवेदन स्वीकृत कर 2,09,959 लाख रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है| पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना व विश्वकर्मा योजना के माध्यम से क्रमशः 2,748 उद्योगों और 28,625 से अधिक शिल्पकारों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ा गया है|
बैठक में विकास आयुक्त ने राज्य के औसत (38.25 फीसदी) से कम कार्य-प्रदर्शन करने वाले और रेड जोन में शामिल प्रमुख बैंकों को अपनी साख प्रक्रिया में तेजी लाने और वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में साख योजना के लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया| उन्होंने बड़े बैंकों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिन प्रमुख बैंकों के पास राज्य की भारी जमा पूंजी मौजूद है, उनका साख जमा अनुपात 50 फीसदी से कम होना एक गंभीर विषय है|इन बैंकों को बिहार की जनता के पैसे को बिहार के ही कृषि, एमएसएमई, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण के माध्यम से वापस निवेश करना होगा ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति को और अधिक बल मिले| उन्होंने बैंकों को स्पष्ट हिदायत दी कि वे ऋण आवेदनों की पेंडेंसी को जल्द से जल्द समाप्त करें और विशेष रूप से केसीसी, पीएम विश्वकर्मा तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की योजनाओं में लोन रिजेक्शन दर को न्यूनतम स्तर पर लाएं|बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुख्य संयोजक, विभिन्न सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ महाप्रबंधक एवं राज्य सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया|
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!