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बिहार में इको-टूरिज्म से बदल रही पर्यटन की तस्वीर

by Munna Pathak

पटना : बिहार की पहचान अब केवल प्राचीन इतिहास, बौध एवं जैन विरासत और धार्मिक स्थलों तक ही सिमित नहीं रह गई है| बिहार प्रदेश की हरी-भरी संपदा, वन्य जीव, पहाड़, झड़ने, गेम जल श्रोत, जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्यता भी पर्यटकों को अपनी और आकर्षित कर रहा है| इसी संभावनाओं को नई पहचान देने के लिए बिहार सरकार ने इको- टूरिज्म को पर्यटन विकास को महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है| सरकार का जोर ऐसे पर्यटन मॉडल पर है, जिसमें प्रकृति का आनंद भी मिले और उसका संरक्षण भी सुनिश्चित हो| इको-टूरिज्म के विकास के साथ स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी लगातार विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं|

राजगीर नेचर सफारी ने बदली पर्यटन की तस्वीर:

राजगीर नेचर सफारी बिहार में इको-टूरिज्म के बदलते स्वरूप का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरी है| पहाड़ियों और प्राकृतिक परिवेश के बीच विकसित यह स्थल पर्यटकों को प्रकृति के करीब आने के साथ ही रोमांच का अनुभव कराता है| यहां प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ साहसिक गतिविधियों ने पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बनाया है| इससे राजगीर के पारंपरिक धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को एक नया आयाम मिला है| अब पर्यटक राजगीर में विरासत देखने के साथ जंगल, पहाड़ और रोमांच का भी आनंद ले रहे हैं| इससे आसपास के क्षेत्रों में होटल, परिवहन, खान-पान, स्थानीय उत्पाद, गाइड और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावनाएं प्रबल हो रही है|

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल का आकर्षण:

पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल है| घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और विभिन्न वन्य-जीव प्रजातियां इसे प्रकृति प्रेमियों और वन्य-जीव पर्यटकों के लिए खास बनाती हैं| यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ वन्य-जीव और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है| इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर आय के वैकल्पिक साधन विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है|

भीमबांध में जंगल और गर्म जल-स्रोत का अनूठा संगम:

मुंगेर का भीमबांध अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, साल के जंगल, जैव विविधता और गर्म जल-स्रोतों के कारण अलग पहचान रखता है| जंगल के बीच गर्म जलस्रोत और शांत प्राकृतिक वातावरण इसे प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए विशेष बनाते हैं| क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं के विकास से भीमबांध को बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं|

धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति का अनुभव:

बिहार में इको-टूरिज्म की एक खास विशेषता धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का समन्वय है| कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी धाम, रोहतास और अन्य पहाड़ी-वन क्षेत्रों में धार्मिक विरासत के साथ प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है|इससे पर्यटकों को एक ही यात्रा में धार्मिक आस्था, इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है| यही विविधता बिहार को दूसरे पर्यटन राज्यों से अलग पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है|

पर्यटन से गांवों तक पहुंचेगा रोजगार:

इको-टूरिज्म का सबसे बड़ा प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है| सरकार का प्रयास है कि पर्यटन स्थलों के आस-पास रहने वाले लोगों को केवल पर्यटक देखने वाले दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन अर्थव्यवस्था के सक्रिय भागीदार के रूप में जोड़ा जाए| इसके लिए स्थानीय गाइड, होम-स्टे, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य सेवाओं से युवाओं एवं ग्रामीण परिवारों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है| इससे पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय स्तर तक पहुंचने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है|

विकास के साथ संरक्षण भी:

बिहार में इको टूरिज्म का आधार केवल पर्यटन सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है| पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता, पर्यावरणीय संतुलन, प्लास्टिक और प्रदूषण नियंत्रण तथा प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है| सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि पर्यटन ऐसा हो, जिसमें प्रकृति आकर्षण का केंद्र भी बने और संरक्षण की प्रेरणा भी|

बिहार में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं:

वन संपदा, जैव विविधता, वन्यजीव, पहाड़, नदियां, झरने, गर्म जल-स्रोत और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत इन सभी का समृद्ध संयोजन बिहार को इको-टूरिज्म के क्षेत्र में विशिष्ट संभावनाओं वाला राज्य बनाता है|वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लेकर राजगीर, भीमबांध, कैमूर और अन्य प्राकृतिक स्थलों तक फैली यह विरासत बिहार के पर्यटन मानचित्र को नया विस्तार दे रही है| आने वाले समय में इको-टूरिज्म पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार के बीच एक मजबूत सेतु बन सकता है|सरकार की कोशिश है कि बिहार में आने वाला पर्यटक केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को देखकर वापस न लौटे, बल्कि यहां की प्रकृति, जंगल, वन्य-जीव और ग्रामीण जीवन को भी अपने पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाए| यही प्रयास बिहार को देश के प्रमुख प्रकृति एवं इको-टूरिज्म गंतव्यों में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है|

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